NPS क्या है (NPS Kya Hai)? National Pension System — Tax Benefit से Withdrawal तक पूरी जानकारी

Payroll और TDS के नौ साल में एक pattern बार-बार दिखा — January आते ही 80C proof जमा होने लगते, और जिनकी ₹1.5 lakh की limit PF, insurance premium या home-loan principal से पहले ही भर चुकी होती, वो अक्सर पूछते: “अब कहाँ invest करूँ जिससे थोड़ा और टैक्स बचे?” यहीं से ज़्यादातर लोगों का पहला सामना NPS से होता है — क्योंकि 80C भर जाने के बाद भी अलग से ₹50,000 का deduction देने वाली यही एक जगह है। 2018 में जब मैंने ख़ुद अपना NPS account खोला, वजह भी यही थी — मेरी 80C limit PF और LIC premium से पहले ही भर चुकी थी।
पर NPS सिर्फ़ tax-saving का एक और box नहीं है — ये एक पूरी retirement scheme है, जिसमें fund allocation के फ़ैसले भी करने होते हैं और withdrawal के नियम भी बाकी tax-saving options से अलग हैं। यही article उसी क्रम में चलता है — शुरुआत से लेकर उस हिस्से तक जो maturity पर सबसे ज़्यादा लोगों को चौंकाता है।
Pakka Points
- NPS एक PFRDA-regulated, market-linked retirement scheme है — guaranteed return नहीं देती
- 18-70 साल का कोई भी नागरिक join कर सकता है — Tier I lock-in वाला मुख्य account, Tier II पूरी तरह voluntary
- Section 80CCD(1) 80C की ₹1.5 lakh limit के अंदर है, Section 80CCD(1B) उसके ऊपर अलग से ₹50,000 देता है
- दोनों benefit सिर्फ़ old tax regime में मिलते हैं — new regime में सिर्फ़ employer का contribution काम आता है
- December 2025 के PFRDA amendment के बाद maturity पर lump sum की सीमा corpus के size पर depend करती है
NPS क्या है — PFRDA-regulated, market-linked retirement scheme
NPS यानी National Pension System — भारत सरकार की एक retirement savings scheme, जिसे PFRDA (Pension Fund Regulatory and Development Authority) regulate करता है। शुरुआत 2004 में हुई थी, सिर्फ़ 1 जनवरी 2004 के बाद join करने वाले central government employees के लिए अनिवार्य के तौर पर। 2009 में इसे हर भारतीय नागरिक के लिए खोल दिया गया — तब से कोई भी salaried या self-employed व्यक्ति इसमें account खोल सकता है।
आपका पैसा SEBI-registered mutual funds जैसे ही professional Pension Fund Managers (PFMs) चलाते हैं, जो equity, corporate bonds और government securities में invest करते हैं। इसलिए NAV रोज़ बदलती है, return fix नहीं है — FD या PPF जैसा guaranteed return वाला product समझना ग़लती है। जो चीज़ fix है वो सिर्फ़ ये कि regulator कौन है और पैसा कहाँ locked रहेगा।
कौन join कर सकता है — Tier I और Tier II का फ़र्क़
18 से 70 साल का कोई भी भारतीय नागरिक — salaried हो या self-employed — NPS join कर सकता है। Account खुलते ही दो हिस्से साथ बनते हैं, और दोनों को एक ही समझना सबसे बड़ी confusion है:
| Tier I | Tier II | |
|---|---|---|
| क्या है | मुख्य pension account, अनिवार्य | वैकल्पिक savings account |
| Lock-in | 60 साल की उम्र तक | कोई नहीं — कभी भी निकाल सकते हैं |
| Tax benefit | 80CCD(1), 80CCD(1B), 80CCD(2) — सब यहीं लागू | आम तौर पर कोई नहीं (सिर्फ़ government employees के लिए 3-साल lock वाला सीमित 80C benefit) |
| शुरू करने की शर्त | अकेले खोला जा सकता है | Tier I account पहले से होना ज़रूरी है |
जब भी कोई सिर्फ़ ‘NPS account’ कहता है, आम तौर पर उसका मतलब Tier I होता है — इसी article में आगे जहाँ tax और withdrawal की बात है, वो सब Tier I के नियम हैं।
पैसा कहाँ जाता है — Active Choice बनाम Auto Choice
Account खुलते वक़्त एक फ़ैसला करना होता है — अपने पैसे का allocation ख़ुद तय करना है, या PFRDA के तय किए हुए फ़ॉर्मूले पर छोड़ देना है। पैसा चार asset classes में बँटता है — Equity (E), Corporate Debt (C), Government Securities (G), और Alternative Assets (A, बहुत छोटा हिस्सा)।
Active Choice में आप ख़ुद तय करते हैं कि कितना percentage किस asset class में जाए — equity में अधिकतम 75% तक, वो भी सिर्फ़ 50 साल की उम्र तक; उसके बाद हर साल equity की सीमा अपने आप कम होती जाती है। जो लोग खुद अपना portfolio manage करना चाहते हैं, उनके लिए ये रास्ता है।
Auto Choice में उम्र के हिसाब से equity अपने आप कम होती जाती है — तीन life-cycle funds में से एक चुनना होता है, और कुछ न चुनने पर बीच वाला (Moderate) default के तौर पर लागू हो जाता है:
| Life-cycle fund | Equity cap (35 साल तक) | 35 के बाद हर साल |
|---|---|---|
| Aggressive (LC75) | 75% | 4% घटता है, 55 साल तक |
| Moderate (LC50) — default | 50% | 2% घटता है, 55 साल तक |
| Conservative (LC25) | 25% | 1% घटता है, 55 साल तक |
मतलब 36वें साल के जन्मदिन से equity की सीमा हर साल अपने-आप कम होकर debt की तरफ़ shift होती जाती है — 55 साल की उम्र तक इसका सबसे कम level आ जाता है। PFRDA की scheme information document में exact साल-दर-साल table मिलती है।
Tax benefit — यहीं सबसे ज़्यादा confusion होती है
NPS का सबसे बड़ा आकर्षण यही है, और सबसे ज़्यादा ग़लत भी यही समझा जाता है। तीन अलग sections हैं, तीनों की शर्त अलग:
| Section | किसका contribution | Limit | Regime |
|---|---|---|---|
| 80CCD(1) | अपना (employee/self-employed) | Salary का 10% (self-employed: gross income का 20%) — 80C की ₹1.5 lakh limit के अंदर | सिर्फ़ old regime |
| 80CCD(1B) | अपना (extra, exclusive) | अलग से ₹50,000 — 80C की limit के ऊपर | सिर्फ़ old regime |
| 80CCD(2) | Employer का contribution | Salary का 10% (private) / 14% (government, और FY 2025-26 से new regime में सभी employees) | दोनों regime — old में 10%/14%, new regime में 14% |
80CCD(1) और 80CCD(1B) मिलाकर अपनी जेब से किए गए contribution पर अधिकतम ₹2 lakh तक का deduction बनता है — पर सिर्फ़ old tax regime में। 80CCD(1B) की सबसे ख़ास बात: ये ₹50,000 का slot सिर्फ़ NPS के लिए है, PPF, ELSS या किसी और 80C instrument से नहीं मिलता।
पहले लिख लीजिए, क्योंकि यही तीन नंबर सबसे ज़्यादा उलझाते हैं — 80C की ₹1.5 lakh limit, उसके ऊपर 80CCD(1B) की अलग ₹50,000, और employer के हिस्से की कोई upper-limit वाली सीमा नहीं (सिर्फ़ salary का percentage-based cap)। ये दोनों personal-contribution वाले benefit सिर्फ़ old regime में मिलते हैं — new regime चुना है तो सिर्फ़ employer का हिस्सा ही काम आएगा। किस regime में overall फ़ायदा ज़्यादा है, वो हिसाब New Tax Regime vs Old Tax Regime वाले guide में लगाया जा सकता है।
Maturity पर withdrawal — 60% lump sum, बाकी annuity
पुराना नियम सबके लिए एक जैसा था — corpus का 60% tax-free lump sum के तौर पर निकल जाता, बाक़ी 40% से annuity ख़रीदना अनिवार्य था। दिसंबर 2025 में PFRDA ने (Exits and Withdrawals under the NPS) Amendment Regulations, 2025 notify कीं, जिसने non-government subscribers के लिए ये structure corpus के साइज़ के हिसाब से बदल दिया:
| Corpus (60 साल की उम्र पर) | क्या मिलता है |
|---|---|
| ₹8 lakh तक | पूरा corpus एक साथ lump sum — annuity अनिवार्य नहीं |
| ₹8-12 lakh | ₹6 lakh तक तुरंत lump sum, बाक़ी Systematic Unit Redemption (कम-से-कम 6 साल) या annuity या दोनों का mix |
| ₹12 lakh से ऊपर | 80% तक lump sum, कम-से-कम 20% से annuity ख़रीदना अनिवार्य |
Government employees के लिए पुराना 60:40 वाला नियम (60% lump sum, 40% अनिवार्य annuity) अभी भी वैसा ही चल रहा है — ये बदलाव सिर्फ़ non-government (all-citizen model के) subscribers के लिए है।
टैक्स वाला हिस्सा यहीं सबसे ज़्यादा भ्रम पैदा करता है — सिर्फ़ 60% corpus tax-free है, चाहे नए नियम में lump sum के तौर पर 80% तक क्यों न निकाला जाए। मतलब अगर कोई ₹12 lakh से ऊपर के corpus में 80% lump sum लेता है, तो उसमें से 60% tax-free रहता है, पर बाक़ी 20% (60% से 80% के बीच का हिस्सा) उसके slab rate से टैक्स के दायरे में आता है — जब तक इस पर कोई नई clarification नहीं आती।
और annuity वाला हिस्सा — जो 20-40% अनिवार्य रूप से annuity ख़रीदने में जाता है — ख़रीदते वक़्त टैक्स नहीं लगता, पर उस annuity से हर महीने/साल जो pension मिलती रहेगी, वो पूरी तरह उस साल की income मानी जाकर slab rate से टैक्स होती है। यही वो हिस्सा है जो सबसे ज़्यादा लोगों को चौंकाता है — maturity पर टैक्स की कहानी वहीं ख़त्म नहीं होती, annuity चलने तक सालों साल चलती रहती है।
Maturity से पहले — partial withdrawal के नियम
60 साल से पहले भी पैसा निकालने की सुविधा है, पर बिल्कुल खुली नहीं है। पहले लिख लीजिए, क्योंकि हर शर्त साथ में लागू होती है:
- Account कम-से-कम 3 साल पुराना हो — पहले 3 साल में कोई partial withdrawal नहीं मिलती।
- सिर्फ़ अपने contribution के 25% तक — employer का हिस्सा और उस पर बना return इस calculation में शामिल नहीं होता।
- पूरी membership में अधिकतम 4 बार — 2025 के PFRDA amendment से पहले ये सीमा 3 बार थी।
- सिर्फ़ specific वजहों पर — बच्चों की higher education या शादी, पहला घर ख़रीदना/बनाना, अपने या परिवार के किसी सदस्य के medical treatment/hospital में भर्ती होने पर, या skill development/अपना venture शुरू करने के लिए। 2025 के amendment ने medical वाली वजह को और चौड़ा कर दिया — पहले सिर्फ़ चुनी हुई गंभीर बीमारियों की list तक सीमित था, अब किसी भी hospitalization पर मिल सकता है।
NPS बनाम PPF/EPF — फ़र्क़ समझिए, “बेहतर” मत ढूंढिए
तो फिर सवाल आता है — retirement के लिए NPS रखें या PPF/EPF पर ही टिके रहें? जवाब “बेहतर” ढूंढने में नहीं, फ़र्क़ समझने में है — दोनों अलग काम करते हैं:
| NPS | PPF / EPF | |
|---|---|---|
| Return | Market-linked, equity exposure के साथ — fix नहीं | Guaranteed, सरकार तय करती है हर quarter/साल |
| Liquidity | 60 साल तक locked, सिर्फ़ सीमित partial withdrawal | PPF: 7वें साल से partial withdrawal; EPF: job छोड़ने पर निकल सकता है |
| Maturity पर पैसा | एक हिस्सा annuity में जाना अनिवार्य | पूरा पैसा एक साथ, कोई annuity शर्त नहीं |
| Tax | Contribution पर EEE नहीं — annuity income टैक्स होती है | PPF पूरी तरह EEE; EPF भी शर्तों के साथ tax-free |
Equity exposure और mandatory annuitisation — यही वो दो चीज़ें हैं जो NPS को PPF/EPF से structurally अलग बनाती हैं। PPF के पूरे नियम हमारे PPF वाले guide में हैं।
जिसे market-linked growth और extra ₹50,000 का tax slot चाहिए, उसके portfolio में NPS की जगह बनती है। जिसे पूरी तरह guaranteed, कभी न घटने वाला corpus चाहिए, उसके लिए PPF/EPF का role अलग है। ज़्यादातर लोगों के retirement plan में दोनों की जगह बन सकती है — एक-दूसरे का replacement समझना ही सबसे बड़ी ग़लती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
NPS में total कितना tax deduction मिल सकता है?
Old tax regime में तीन जगह से मिलता है। पहला — Section 80CCD(1) के तहत अपनी salary का 10% (self-employed के लिए gross income का 20%), जो overall 80C की ₹1.5 lakh limit के अंदर ही गिनता है। दूसरा — Section 80CCD(1B) के तहत अलग से ₹50,000, जो 80C की limit के ऊपर मिलता है और सिर्फ़ NPS के लिए है। यानी अपनी जेब से डाले पैसे पर अधिकतम ₹2 lakh तक का फ़ायदा। तीसरा, अगर employer भी contribute करता है, तो वो हिस्सा Section 80CCD(2) के तहत अलग से, बिना किसी upper-limit की सीमा में गिने, deduction देता है — दोनों regime में।
New tax regime में NPS पर कोई फ़ायदा मिलता है क्या?
अपनी जेब से डाले contribution पर — Section 80CCD(1) और 80CCD(1B) दोनों — new regime में कुछ नहीं मिलता, ये पूरी तरह old regime की सुविधा है। पर एक अपवाद है — अगर employer NPS में अपनी तरफ़ से contribute करता है, तो वो हिस्सा Section 80CCD(2) के तहत new regime में भी deduction देता है (FY 2025-26 से सभी employees के लिए salary का 14% तक)। मतलब new regime में सिर्फ़ employer वाला हिस्सा काम आता है, अपना contribution नहीं।
60 साल से पहले NPS से पैसा निकाल सकते हैं क्या?
हाँ, पर शर्तों के साथ। Account खुले कम-से-कम 3 साल हो चुके हों तो partial withdrawal मिलती है — वो भी सिर्फ़ अपने contribution के 25% तक (employer के पैसे और return को छोड़कर), और सिर्फ़ बच्चों की higher education/शादी, पहला घर ख़रीदने/बनाने, medical treatment, या skill development/अपना venture शुरू करने जैसी specific वजहों पर। पूरी नौकरी के दौरान अधिकतम 4 बार ही ये सुविधा मिलती है।
60 साल की उम्र पर पूरा पैसा एक साथ मिल जाएगा क्या?
पहले सबके लिए एक ही 60:40 का नियम था। दिसंबर 2025 के PFRDA amendment के बाद non-government subscribers के लिए ये corpus के साइज़ पर depend करता है — ₹8 lakh तक पूरा corpus lump sum मिल सकता है, ₹8-12 lakh में ₹6 lakh तक lump sum और बाक़ी staggered तरीके से, और ₹12 lakh से ऊपर के corpus में 80% तक lump sum लिया जा सकता है, बाक़ी 20% से annuity ख़रीदना ज़रूरी है। Government employees के लिए पुराना 60:40 वाला नियम अभी भी वैसा ही चल रहा है।
Annuity से मिलने वाली pension पर tax लगता है क्या?
हाँ, पूरी तरह। जो हिस्सा annuity ख़रीदने में जाता है, उस वक़्त उस पर tax नहीं लगता — पर उस annuity से जो मासिक/सालाना pension मिलती रहेगी, वो हर साल आपकी बाक़ी income के साथ जुड़कर slab rate से टैक्स होती है। यही वो हिस्सा है जो सबसे ज़्यादा लोगों को चौंकाता है — वो सोचते हैं maturity पर टैक्स की कहानी ख़त्म हो गई, जबकि annuity वाला हिस्सा tax के दायरे में सालों तक बना रहता है।
NPS और PPF में कौनसा बेहतर है?
ये सवाल ही ग़लत तरीके से पूछा जाता है — दोनों अलग काम करते हैं, इसलिए एक ‘बेहतर’ नहीं है। NPS में equity exposure होती है (ज़्यादा growth की संभावना, पर market-risk भी), और maturity पर एक हिस्सा annuity में जाना अनिवार्य है। PPF सरकार-गारंटी वाला, पूरी तरह fixed-return, पूरी तरह tax-free product है, पर उसमें equity नहीं होती। Portfolio में दोनों की अलग-अलग जगह हो सकती है — कोई एक-दूसरे का replacement नहीं है।
Pakke Sources — हमने कहाँ से verify किया
- PFRDA — National Pension System, regulations और scheme details — Exits and Withdrawals under the NPS (Amendment) Regulations, 2025 — दिसंबर 2025 से लागू
- PFRDA — Investment choices (Active/Auto Choice, Life-cycle funds) — LC75/LC50/LC25 का age-based equity-cap schedule
- Income Tax Department — Section 80CCD(1), 80CCD(1B), 80CCD(2) — 80CCD deduction limits — old vs new regime applicability, Aug 2026 तक लागू
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