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माता-पिता के लिए Health Insurance (Parents Ke Liye Health Insurance) — 60+ में असल में क्या देखना है

Pakka-Checked· 21 Aug 2026 · Vikram Mehta
Meera Iyer · Insurance & Loans Desk · Updated: 21 Aug 2026
Parents ke liye health insurance — बेटी अपने बुज़ुर्ग पिता के साथ खड़ी होकर health insurance policy का कागज़ पढ़ती हुई, खुली धूप वाली साफ़ बालकनी में

पिछले महीने एक पाठक ने अपने पिता की policy का wording भेजा और एक ही सवाल पूछा — "₹5 लाख का cover है, फिर अस्पताल ने ₹1.4 लाख हमसे क्यों लिए?" Policy चालू थी, claim reject भी नहीं हुआ था, हर चीज़ "approved" लिखी थी। जवाब उसी कागज़ के पेज 9 पर था, दो लाइनों में — एक co-payment clause और एक room rent की सीमा।

यही है parents ke liye health insurance की असली कहानी। 60 के बाद वाली policy में सवाल "cover कितने का है" नहीं होता। सवाल होता है — उस cover में से आपके हाथ में असल में कितना आएगा। Agent आपको sum insured बताएगा। ये clauses वो नहीं बताएगा, मैं बता रही हूँ।

Pakka Points

  • 1 अप्रैल 2024 से health insurance ख़रीदने की कोई अधिकतम उम्र नहीं — 70+ माता-पिता के लिए भी policy मिलनी ही है (IRDAI)।
  • Senior plans का सस्ता premium अक्सर co-payment और room-rent sub-limit से आता है — दोनों claim के दिन आपकी जेब से निकलते हैं।
  • PED का waiting period अब अधिकतम 3 साल (पहले 4); moratorium 96 महीने से घटकर 60 महीने — 5 साल लगातार चलने के बाद non-disclosure के आधार पर claim नहीं रोका जा सकता, सिवाय साबित हुए fraud के।
  • 22 सितंबर 2025 से individual health premium पर GST 0% — पर insurers का input tax credit भी ख़त्म हुआ, इसलिए 2026 में base premium बढ़े हैं। बचत असली है, 18% नहीं।
  • 60+ माता-पिता का premium देने पर 80D में ₹50,000 तक — सिर्फ़ old regime में। नए Income Tax Act, 2025 में यही Section 126 है।
  • 70 साल से ऊपर हैं तो Ayushman Vay Vandana card income देखे बिना ₹5 लाख देता है — वो पहले लीजिए, private policy उसके ऊपर।

पहले वो नियम, जो 2024 में चुपचाप बदल गया

बहुत सालों तक maximum entry age 65 पर अटकी थी। 66 साल की माँ के लिए policy ढूँढना लगभग नामुमकिन था। IRDAI ने अपने Insurance Products Regulations, 2024 के साथ यह reference हटा दिया — 1 अप्रैल 2024 से किसी भी उम्र में health insurance ख़रीदा जा सकता है, और हर insurer को कम से कम एक ऐसा product रखना है जो हर आयु वर्ग के लिए उपलब्ध हो।

इसका practical मतलब यह है कि "sir, is umar me policy nahi milti" अब एक बहाना है, नियम नहीं। मिलेगी। महँगी मिलेगी, शर्तों के साथ मिलेगी — पर मना नहीं किया जा सकता।

Premium: 10% का cap क्या रोकता है, और क्या नहीं

30 जनवरी 2025 को IRDAI ने insurers से कहा कि 60 साल से ऊपर वालों के health premium में साल भर में 10% से ज़्यादा बढ़ोतरी IRDAI की पूर्व मंज़ूरी के बिना नहीं — और senior citizens के लिए बना कोई product वापस लेना हो, तब भी पहले मंज़ूरी लेनी होगी। यह उन शिकायतों के बाद आया जिनमें एक ही साल में 50-60% तक hike की बात थी।

अब वो हिस्सा जो कोई नहीं बताता। यह cap उसी product पर, उम्र-आधारित सामान्य बढ़ोतरी को घेरता है। जिस साल आपके पिता एक age-band से अगले में जाते हैं (मान लीजिए 65 से 66, या 70 से 71), उस साल की जो जायज़ band-jump है, वो अलग चीज़ है। इसलिए policy लेते वक़्त brochure के पीछे लगी age-band premium table देखिए — आज का premium नहीं, अगले दस साल का रास्ता देखिए। 62 पर ₹28,000 सुनने में ठीक लगता है; उसी table में 72 पर ₹61,000 लिखा हो तो फ़ैसला बदल जाता है।

GST 0% हो गया — पर premium 18% कम नहीं हुआ

22 सितंबर 2025 से सभी individual health insurance policies — family floater और senior citizen plans समेत — GST से मुक्त हैं। पहले 18% लगता था। Group/employer वाली policies पर अब भी 18% लगता है, इसलिए यह राहत सिर्फ़ ख़ुद ख़रीदी गई policy पर है।

अब clause वाला हिस्सा। GST शून्य होने का मतलब यह भी है कि insurance company अपने ख़र्चों (office, technology, commission) पर input tax credit नहीं ले सकती। वो लागत कहीं तो जाएगी — और वो base premium में गई है। 2026 में कई insurers ने base rates ऊपर किए हैं। कुल बिल अब भी पहले से कम बैठता है, पर अगर आप 18% की सीधी बचत का हिसाब लगाकर बैठे हैं, तो renewal notice देखकर झटका लगेगा।

GST से पहले (सितंबर 2025 तक)अब (2026 renewal)
Base premium₹30,000₹32,400 (base revision के बाद)
GST₹5,400 (18%)₹0
कुल भुगतान₹35,400₹32,400
असल बचत₹3,000 — यानी लगभग 8.5%, 18% नहीं

आँकड़े illustration के लिए हैं। असल base revision insurer और product के हिसाब से अलग-अलग है — अपने renewal notice पर पिछले साल के base premium से तुलना कीजिए, कुल राशि से नहीं।

Co-payment और sub-limit — जहाँ ₹5 लाख का cover ₹2.6 लाख बन जाता है

यह इस पूरे article की सबसे ज़रूरी table है। Senior citizen plans तीन तरीक़ों से आपके claim को छोटा करते हैं, और तीनों एक साथ लग सकते हैं:

  • Co-payment — हर approved claim का एक तय प्रतिशत आपका। 10%, 20%, कभी 30%।
  • Room rent limit — अक्सर sum insured का 1% प्रतिदिन, या एक तय श्रेणी का कमरा।
  • Proportionate deduction — यही असली चोट है। अगर आपने limit से महँगा कमरा लिया, तो सिर्फ़ कमरे का अंतर नहीं कटता — डॉक्टर की फ़ीस, नर्सिंग, operation theatre तक उसी अनुपात में कम कर दिए जाते हैं।
चरणहिसाबराशि
अस्पताल का कुल बिल₹4,00,000
Sum insured₹5,00,000
Room rent limitSI का 1% = ₹5,000/दिन; लिया गया कमरा ₹8,000/दिनअनुपात = 62.5%
Proportionate deduction के बाद payable₹4,00,000 × 62.5%₹2,50,000
20% co-payment₹2,50,000 का 20%− ₹50,000
Non-medical items (gloves, gown आदि)आमतौर पर कभी cover नहीं− ₹18,000
Insurer ने असल में दिया₹1,82,000
आपकी जेब से₹4,00,000 − ₹1,82,000₹2,18,000

यही वो हिसाब है जो पाठक के पिता वाले case में हुआ था। कोई clause छिपा नहीं था — सब policy wording में लिखा था, बस brochure में नहीं।

इसलिए मेरा नियम शर्त के साथ है: अगर आपके माता-पिता 65 से ऊपर हैं और budget सीमित है, तब भी co-pay 20% से ऊपर वाला plan मत लीजिए — और room rent पर "single private room, बिना rupee limit" लिखा हो, तो थोड़ा ज़्यादा premium देना सही सौदा है। यही एक line ऊपर वाली table को आधा कर देती है।

तीन waiting period, और वो एक तारीख़ जिसके बाद डर ख़त्म होता है

Parents की policy में सबसे बड़ा डर यही होता है — "papa को BP है, sugar है, claim आएगा तो मना कर देंगे।" इसका जवाब तारीख़ों में है:

परतअवधिकिस पर लागू
Initial waiting30 दिनदुर्घटना छोड़कर हर बीमारी
Specific illnessआमतौर पर 24 महीनेमोतियाबिंद, hernia, घुटना बदलना, पथरी जैसी सूचीबद्ध बीमारियाँ
Pre-existing disease (PED)अधिकतम 3 साल (पहले 4)policy से पहले से चली आ रही बीमारियाँ, जो form में बताई गई हों
Moratorium60 महीने (पहले 96)इसके बाद non-disclosure/misrepresentation के आधार पर claim contest नहीं हो सकता

Waiting period पुरानी policy से नई में port करने पर आगे बढ़ता है, शून्य नहीं होता — इसीलिए चलती policy को बंद करके नई ख़रीदना लगभग हमेशा ग़लत फ़ैसला है।

Moratorium वाली पंक्ति को दोबारा पढ़िए। IRDAI ने इसे 96 महीने से घटाकर 60 महीने कर दिया है। मतलब — 5 साल लगातार बिना break चली policy के बाद insurer यह कहकर claim नहीं रोक सकता कि "आपने फ़लाँ बात नहीं बताई थी", सिवाय उस स्थिति के जहाँ साबित हुआ fraud हो या permanent exclusion contract में लिखा हो। 62 साल की उम्र में policy शुरू करने वाले के लिए यह सबसे बड़ी राहत है, और यही एक वजह है कि policy आज लेनी चाहिए, अगले साल नहीं — घड़ी आज से चलेगी।

शर्त वही एक है: form में सब लिखवाइए। BP, sugar, thyroid, पिछला operation, चालू दवाइयाँ। यह डर कि "बता देंगे तो premium बढ़ जाएगा" सही है — premium बढ़ेगा। पर छिपाने का नतीजा यह होता है कि पाँच साल बाद bypass के वक़्त पूरी policy पर सवाल उठ जाता है। यही असली नुक़सान है, और इसे health insurance के exclusions वाले guide में हमने विस्तार से लिखा है।

Ayushman Vay Vandana — 70+ के लिए, income देखे बिना

अगर आपके माता-पिता 70 साल या उससे ऊपर हैं, तो सबसे पहला काम private policy ख़रीदना नहीं है — Ayushman Vay Vandana card बनवाना है। सितंबर 2024 के Cabinet फ़ैसले के बाद 70+ के हर नागरिक को आय देखे बिना ₹5 लाख का सालाना cover मिलता है, चाहे परिवार कितना भी कमाता हो। पहले से किसी और सरकारी योजना में हैं, तब भी 70+ वाला यह cover अलग से मिलता है।

इसकी सीमाएँ ईमानदारी से जान लीजिए: इलाज empanelled अस्पतालों में ही, तय package rates पर, और हर private अस्पताल इसमें नहीं है। इसलिए सही ढाँचा यह है — Vay Vandana को नींव मानिए, और उसके ऊपर एक private policy रखिए ताकि आपके शहर का जो अस्पताल आप असल में चुनेंगे वो भी covered हो। पूरी योजना Ayushman Bharat (PM-JAY) वाले guide में है।

Tax: ₹50,000 किसे मिलता है, और किसे नहीं

60 साल से ऊपर के माता-पिता का premium आप भरते हैं, तो ₹50,000 तक की deduction — यह आपकी अपनी family वाली limit के अलावा है। माता-पिता 60 से कम हों तो ₹25,000। इसमें ₹5,000 तक का preventive health check-up भी शामिल है, और वही एक ख़र्च है जो cash में देने पर भी चलता है — premium cash में भरा तो deduction नहीं मिलेगी।

अब वो शर्त जो हर insurance ad में छूट जाती है: यह छूट सिर्फ़ old tax regime में है। New regime चुना है तो 80D का दावा नहीं बनता — और चूँकि अब ज़्यादातर salaried लोग default रूप से new regime में हैं, कई लोग वो benefit गिन रहे हैं जो उन्हें मिल ही नहीं रहा। एक और बात नोट कर लीजिए: नए Income Tax Act, 2025 में, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू है, यही प्रावधान अब Section 126 है (80C अब Section 123 है)। शर्तें और limits वही हैं, सिर्फ़ नंबर बदला है — ITR भरते वक़्त नया नंबर देखकर घबराइए मत।

अपने लिए सही regime का हिसाब new vs old regime वाले guide और Income Tax Calculator से लगाइए। और अगर माता-पिता 60 से ऊपर हैं पर उनकी कोई policy नहीं है, तो उनके असल medical ख़र्च भी उसी ₹50,000 की सीमा में claim हो सकते हैं — यह रास्ता उन परिवारों के लिए है जहाँ अब कोई insurer cover देने को तैयार नहीं।

Insurer चुनने का असली तरीक़ा — CSR अकेले झूठ बोलता है

हर ad में एक ही संख्या दिखती है: claim settlement ratio 99%। वो संख्या life insurance के लिए ज़्यादा काम की है; health में यह इसलिए भ्रम पैदा करती है क्योंकि इसमें "₹4 लाख के claim में ₹1.8 लाख दिया" भी settled ही गिना जाता है। तीन चीज़ें एक साथ देखिए:

क्या देखेंकहाँ सेअच्छा माना जाता है
Incurred Claims Ratio (ICR)IRDAI Annual Report, company-wise70%-90% — बहुत कम मतलब कंजूस, बहुत ज़्यादा मतलब आगे premium बढ़ेगा
Complaints per 10,000 policiesIRDAI Annual Report5 से कम
Claim settlement ratioIRDAI/insurer disclosureऊँचा हो, पर अकेले मत देखिए
आपके शहर के network hospitalsinsurer की website की hospital listजिस अस्पताल में माता-पिता असल में जाते हैं, वो list में हो

ICR का मतलब — हर ₹100 premium में से कितने रुपये claims में गए। यह भुगतान की उदारता का ज़्यादा ईमानदार संकेत है, बनिस्बत इसके कि कितनी files 'settled' मार्क हुईं।

आख़िरी पंक्ति सबसे ज़्यादा काम की है और सबसे कम पढ़ी जाती है। माता-पिता emergency में उसी अस्पताल जाएँगे जो घर से दस मिनट पर है। अगर वो insurer की network list में नहीं है, तो cashless का पूरा फ़ायदा काग़ज़ पर रह जाता है।

Claim के दिन आपके पास कौन-से अधिकार हैं

29 मई 2024 के IRDAI Master Circular ने पहली बार घड़ी लगा दी है, और ये तारीख़ें आपके पक्ष में हैं:

स्थितिसमय-सीमादेर होने पर
Cashless की मंज़ूरीअस्पताल से पूरे दस्तावेज़ मिलने के 1 घंटे के भीतरदेर से हुआ अतिरिक्त ख़र्च insurer का
Discharge की final मंज़ूरीअनुरोध के 3 घंटे के भीतरअतिरिक्त राशि insurer के shareholders' funds से, आपके sum insured से नहीं
Claim का निपटाराआख़िरी ज़रूरी दस्तावेज़ से 30 दिनbank rate से 2% ऊपर की दर से ब्याज

यह अधिकार माँगने पर नहीं, नियम से मिलता है। अस्पताल जब कहे 'insurance approval का इंतज़ार है', तब घड़ी देखिए और insurer के toll-free पर यही circular का हवाला दीजिए।

एक अच्छी ख़बर भी है, जो चुपचाप बन रही है। सरकार का National Health Claims Exchange (NHCX) अस्पतालों और insurers को एक ही डिजिटल रास्ते पर ला रहा है — अप्रैल 2026 तक इसमें 83 payers, 42,687 अस्पताल-केंद्र और 2.34 करोड़ से ज़्यादा claims process हो चुके थे। जितने ज़्यादा अस्पताल इस पर आएँगे, cashless की वो एक घंटे वाली घड़ी उतनी ही असल में चलेगी।

Claim अटक जाए या मना हो जाए तो — तीन सीढ़ियाँ

  1. Insurer का Grievance Redressal Officer। लिखित शिकायत, policy और claim number के साथ। 15 दिन में जवाब उनकी ज़िम्मेदारी है। Email रखिए, फ़ोन पर बात मत निपटाइए।
  2. IRDAI का Bima Bharosa portal। शिकायत दर्ज होती है, token number मिलता है, और status ऑनलाइन दिखता है।
  3. Insurance Ombudsman। मुफ़्त, वकील की ज़रूरत नहीं, और उसका award insurer पर बाध्यकारी है। आप पर नहीं — award पसंद न आए तो आप आगे अदालत जा सकते हैं, insurer नहीं।

एक और सावधानी, क्योंकि बुज़ुर्ग माता-पिता इसका सबसे आसान निशाना हैं: "policy renew कीजिए, अभी OTP बताइए" वाली कॉल हर साल renewal के आसपास बढ़ जाती है। Premium हमेशा insurer की अपनी website या शाखा से भरिए, किसी link से नहीं — phishing link पहचानने वाला guide उन्हें एक बार पढ़ाकर रखिए।

ख़रीदने से पहले, इन सात लाइनों पर उँगली रखिए

  1. Co-payment कितना है, और क्या हर claim पर लगता है या सिर्फ़ कुछ हालात में?
  2. Room rent पर rupee limit है या श्रेणी? Proportionate deduction का clause है?
  3. PED waiting 3 साल है, 2 साल है, या कुछ और? किस तारीख़ से गिना जाएगा?
  4. Age-band premium table अगले दस साल के लिए क्या कहती है?
  5. आपके शहर के कौन-से अस्पताल network में हैं — नाम से जाँचिए, संख्या से नहीं।
  6. Sub-limits किन-किन इलाजों पर हैं (मोतियाबिंद, घुटना, angioplasty पर अक्सर होती हैं)?
  7. Restoration/refill benefit है? एक साल में दूसरी बार अस्पताल जाना पड़े तो cover बचेगा?

इन सात जवाबों के बिना कोई senior citizen policy मत ख़रीदिए। ये सातों policy wording में लिखे होते हैं — brochure में नहीं, app के summary पेज पर नहीं। Wording माँगिए, और उसे ख़रीदने से पहले पढ़िए, claim के दिन नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Parents ke liye health insurance kis umar tak mil jata hai?

किसी भी उम्र तक। IRDAI ने 1 अप्रैल 2024 से health insurance ख़रीदने की maximum entry age की सीमा हटा दी है — पहले ज़्यादातर plans 65 साल पर दरवाज़ा बंद कर देते थे। अब हर insurer को कम से कम एक ऐसा product रखना है जो हर उम्र वाला ख़रीद सके। मतलब 72 साल के पिता के लिए भी policy मिलेगी — सवाल यह है कि किस premium, कितने co-pay और कितने waiting period पर।

Senior citizen health insurance me co-payment kya hota hai?

Co-payment मतलब हर claim का एक तय हिस्सा आपको ख़ुद भरना है, चाहे claim सही हो और policy चालू हो। 20% co-pay का मतलब ₹4 लाख के approved bill में ₹80,000 आपकी जेब से। ये सबसे बड़ी वजह है कि senior plans का premium सस्ता दिखता है। ख़रीदने से पहले policy wording में देखिए कि co-pay सिर्फ़ कुछ हालात में लगता है या हर claim पर, और क्या ज़्यादा premium देकर उसे हटाया जा सकता है।

Parents ki purani bimari (BP, sugar) cover hogi ya nahi?

होगी, पर तुरंत नहीं। IRDAI ने pre-existing disease का maximum waiting period 4 साल से घटाकर 3 साल कर दिया है, और कई plans इसे 2 साल पर बेचते हैं। शर्त एक ही है — proposal form में वो बीमारी लिखवाइए। छिपाई हुई बीमारी बाद में पूरी policy को ख़तरे में डालती है, और तब बात सिर्फ़ उस एक claim की नहीं रहती।

80D me parents ke liye kitni chhut milti hai?

60 साल से ऊपर के माता-पिता का premium देने पर ₹50,000 तक (60 से कम हों तो ₹25,000), आपकी अपनी family के limit के अलावा। पर यह छूट सिर्फ़ old tax regime में मिलती है — new regime चुनने पर 80D का दावा नहीं कर सकते। नए Income Tax Act, 2025 में यही प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से Section 126 कहलाता है; शर्तें और limit वही हैं, सिर्फ़ नंबर बदला है। Premium cash में मत भरिए — cash payment पर deduction नहीं मिलती (सिर्फ़ ₹5,000 तक का preventive health check-up इसका अपवाद है)।

Ayushman card hone ke baad bhi parents ke liye private policy leni chahiye?

अगर आपके माता-पिता 70 साल या उससे ऊपर हैं तो Ayushman Vay Vandana card income देखे बिना ₹5 लाख का cover देता है — वो पहले ले लीजिए, वो मुफ़्त है। पर उसका इलाज empanelled अस्पतालों तक सीमित है और package rates पर चलता है। इसलिए सही जोड़ी यह है: Vay Vandana को base मानिए और उसके ऊपर एक private policy रखिए, ताकि अपने शहर का जो अस्पताल आप असल में चुनेंगे, वो भी cover रहे।

Claim reject ho gaya to parents ke case me kya rasta hai?

तीन सीढ़ियाँ, इसी क्रम में। पहले insurer के Grievance Redressal Officer को लिखित शिकायत — 15 दिन में जवाब देना उसकी ज़िम्मेदारी है। जवाब न आए या ग़लत लगे तो IRDAI के Bima Bharosa portal पर शिकायत दर्ज कीजिए। उसके बाद Insurance Ombudsman — यह रास्ता मुफ़्त है, वकील की ज़रूरत नहीं, और Ombudsman का award insurer पर बाध्यकारी होता है (आप पर नहीं — आप न मानें तो अदालत जा सकते हैं)। हर सीढ़ी पर policy number, claim number और तारीख़ें साथ रखिए।

Pakke Sources — हमने कहाँ से verify किया

  1. IRDAI — Master Circular on Health Insurance Business (29 May 2024)1-ghanta cashless, 3-ghante discharge, 30-din settlement, 60-mahine moratorium
  2. IRDAI — Insurance Products Regulations, 2024Maximum entry age reference hataya (1 April 2024); PED waiting 4 saal se 3 saal
  3. IRDAI — Senior citizen premium revision directive (30 January 2025)60+ ke liye saalana 10% se zyada hike par IRDAI ki poorv manzoori zaroori
  4. Department of Financial Services — GST exemption on individual health & life insurance22 September 2025 se individual health policies GST-mukt; group policies par 18% jaari
  5. Income Tax Department — health insurance deduction₹50,000 senior-citizen parents limit; Income Tax Act, 2025 me Section 126 (1 April 2026 se)
  6. National Health Authority — Ayushman Bharat PM-JAY / Vay Vandana70+ ke liye income-nirpeksh ₹5 lakh cover
  7. IRDAI — Bima Bharosa grievance portalShikayat darj karne aur status dekhne ka aadhikarik portal
Zaroori baat: Ye jaankari education ke liye hai — insurance ki salah nahi. Policy lene se pehle policy wording khud padhein. PaisaPakka koi insurance nahi bechta aur hamare paas koi agent code nahi hai.
Meera Iyer avatar
Insurance & Loans Desk

Policy ka jo page koi nahi padhta, Meera wahi padhti hai. Claim reject kyun hota hai, agreement me kya chhupa hai, kaunsa 'free' card free nahi hai — fine print se pakki jaankari.

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