Dividend क्या होता है (Dividend Kya Hota Hai)? Record Date से Tax तक

सच बोलूँ? Dividend को लेकर मैंने खुद एक बेवक़ूफ़ी की थी, और वो शायद वही बेवक़ूफ़ी है जो हर दूसरा नया investor करता है।
मार्च 2021 की बात है। एक PSU कंपनी ने ₹9 प्रति share का dividend announce किया, record date मुझे पता था, और मैंने ठीक उसी record date की सुबह 250 shares ख़रीद लिए। मन में हिसाब था: 250 × 9 = ₹2,250 अभी मिल जाएँगे। कुछ नहीं मिला। एक रुपया नहीं। वजह वो थी जो मुझे तब पता ही नहीं थी, और जो आज भी ज़्यादातर Hindi articles में ग़लत लिखी हुई है (उस पर नीचे पूरा section है)।
तो dividend kya hota hai, ये पहले एक लाइन में। कंपनी साल भर में जो मुनाफ़ा कमाती है, उसका कुछ हिस्सा वो अपने पास रखती है (business बढ़ाने के लिए) और कुछ हिस्सा shareholders को नक़द बाँट देती है। यही बँटा हुआ हिस्सा dividend है, हिंदी में लाभांश। आप कंपनी के हिस्सेदार हैं, इसलिए मुनाफ़े में हिस्सा बनता है।
पर एक बात शुरू में ही साफ़ कर लीजिए, क्योंकि पूरा article इसी पर टिका है: dividend मुफ़्त का पैसा नहीं है। कंपनी के bank account से निकलकर आपके bank account में आता है, इसलिए कंपनी की value उतनी कम हो जाती है। बाज़ार इसका हिसाब उसी दिन कर लेता है।
Pakka Points
- Dividend = कंपनी के मुनाफ़े का वो हिस्सा जो shareholders को नक़द बाँटा जाता है (लाभांश)
- T+1 settlement के बाद India में ex-date और record date एक ही दिन होते हैं — dividend चाहिए तो एक दिन पहले खरीदिए
- Ex-date पर share का price आम तौर पर dividend जितना गिरता है — ये नुक़सान नहीं, हिसाब है
- FY 2026-27 में dividend आपके slab rate पर tax होता है; एक कंपनी से ₹10,000 से ऊपर पर 10% TDS कटता है
- 1 April 2026 से buyback अब “deemed dividend” नहीं, capital gains है — पुराने articles यहाँ outdated हैं
- 7 साल तक unclaimed dividend हो तो dividend के साथ आपके shares भी IEPF चले जाते हैं
Dividend आता कहाँ से है — और हर कंपनी क्यों नहीं देती
कंपनी का net profit दो रास्तों में बँटता है। पहला रास्ता है retained earnings: पैसा कंपनी अपने पास रखती है, नई factory लगाती है, कर्ज़ चुकाती है, research करती है। दूसरा रास्ता है dividend: पैसा shareholders को दे दिया जाता है।
इसलिए dividend न देना अपने आप में कोई बुरी बात नहीं है। एक तेज़ी से बढ़ती हुई कंपनी अगर अपना पैसा ख़ुद में लगाकर हर साल 20% की rate से बढ़ रही है, तो वही पैसा आपको dividend में देकर 4% yield दिखाने से आपका फ़ायदा कम होगा, ज़्यादा नहीं। इसका उल्टा भी सच है: बहुत mature, धीमी growth वाली कंपनियाँ (utilities, PSU, कई FMCG नाम) मुनाफ़े का बड़ा हिस्सा बाँट देती हैं, क्योंकि उनके पास उस पैसे को लगाने की इतनी जगह ही नहीं बची।
Dividend घोषित करने का फ़ैसला board of directors लेता है, per-share के हिसाब से। मान लीजिए board ने ₹6 प्रति share declare किया और आपके पास 300 shares हैं, तो आपका dividend हुआ ₹1,800. Face value से भी इसे बताया जाता है (जैसे “₹2 के face value पर 300% dividend”), और यहीं बहुत लोग confuse हो जाते हैं। 300% सुनकर मत उछलिए — ₹2 face value पर 300% का मतलब सिर्फ़ ₹6 प्रति share है, आपके ख़रीदे गए भाव पर 300% नहीं।
Record date और ex-date — यहीं पर सबसे बड़ी ग़लती होती है
अब उस ग़लती पर आते हैं जो मैंने 2021 में की थी, और जिसका जवाब लगभग हर पुराने Hindi article में आज भी पुराना पड़ा हुआ है।
Record date वो तारीख़ है जिस दिन कंपनी अपने records देखती है और तय करती है कि आज किसके नाम पर shares दर्ज हैं। जो उस दिन list में है, dividend उसी को मिलेगा। Ex-date वो तारीख़ है जिस दिन (और उसके बाद) share ख़रीदने पर dividend नहीं मिलता, क्योंकि settlement record date के बाद होगा।
पुरानी किताबों वाला नियम कहता था कि ex-date, record date से एक दिन पहले होती है। भारत में वो नियम अब ख़त्म हो चुका है। NSE ने जनवरी 2023 में सारे listed shares को T+1 settlement पर shift कर दिया, यानी आज ख़रीदा हुआ share अगले trading day आपके demat में आता है। इसी वजह से अब भारत में ex-date और record date एक ही दिन होते हैं।
इसका practical मतलब सिर्फ़ एक लाइन में:
| आपने share खरीदा | Settlement | Dividend मिलेगा? |
|---|---|---|
| Record date से 2 दिन पहले | Record date से पहले हो गया | हाँ |
| Record date से 1 trading day पहले | ठीक record date को हो गया | हाँ — यही आख़िरी मौक़ा है |
| Ex-date / record date वाले दिन | Record date के अगले दिन | नहीं |
| Record date के बाद | बहुत देर | नहीं |
Ex-date वाले दिन अगर आप share बेच देते हैं, तब भी dividend आपको ही मिलेगा — क्योंकि record date पर share आपके demat में था। यही वो हिस्सा है जो उल्टा लगता है पर सही है।
मेरी ग़लती अब समझ आई होगी: मैंने record date की सुबह ख़रीदा था, यानी ex-date पर। Share अगले दिन demat में आया, record date निकल चुकी थी, ₹2,250 का dividend किसी और के खाते में गया — उसके, जिसने मुझे वो shares बेचे थे।
Dividend के चार दिन — announcement से पैसे तक
पूरी process में चार तारीख़ें आती हैं। इन्हें एक बार समझ लीजिए, फिर किसी भी कंपनी की announcement पढ़ना आसान हो जाएगा:
| Date | क्या होता है | आपके लिए मतलब |
|---|---|---|
| Declaration / announcement date | Board dividend declare करता है, per-share rate बताता है | यहीं से खबर आती है; price अक्सर उसी दिन हिलता है |
| Ex-date | इस दिन से share “dividend के बिना” trade करता है | आज खरीदा तो dividend नहीं मिलेगा |
| Record date | कंपनी shareholders की list freeze करती है (T+1 में ex-date के same day) | इस दिन demat में share होना चाहिए |
| Payment date | पैसा bank account में credit होता है | Interim में आम तौर पर 30 दिन के अंदर; final में AGM के बाद 30 दिन के अंदर |
Companies Act, 2013 की Section 127 के तहत declare होने के 30 दिन के अंदर dividend का भुगतान करना कंपनी की क़ानूनी ज़िम्मेदारी है।
Ex-date पर share गिर गया — क्या मैंने पैसे गँवा दिए?
ये सवाल हर साल इतनी बार पूछा जाता है कि इसका अपना section बनता है। जवाब: आपने कुछ नहीं गँवाया, पर आपने कमाया भी कुछ नहीं। कम-से-कम पहले दिन तो नहीं।
एक हिसाब देखिए। मान लीजिए share ₹450 का है, आपके पास 100 shares हैं, कंपनी ने ₹8 प्रति share dividend declare किया।
| Ex-date से एक दिन पहले | Ex-date की सुबह | |
|---|---|---|
| Share price (लगभग) | ₹450 | ₹442 |
| 100 shares की value | ₹45,000 | ₹44,200 |
| आने वाला dividend | ₹0 | ₹800 |
| कुल | ₹45,000 | ₹45,000 |
ये theoretical adjustment है। असल में उस दिन का market movement भी ऊपर से जुड़ता है, इसलिए price ठीक ₹8 ही गिरे, ज़रूरी नहीं।
अब इसमें tax जोड़िए और तस्वीर बदल जाती है। अगर आप 30% slab में हैं तो उस ₹800 पर लगभग ₹250 का tax बनता है। यानी dividend वाले दिन आपकी net position ₹45,000 से घटकर ₹44,750 के आसपास आ गई। इसीलिए मैं dividend को “income” की तरह देखता हूँ, “extra return” की तरह नहीं — और यही वजह है कि सिर्फ़ dividend पकड़ने के लिए ex-date से एक दिन पहले share ख़रीदकर बाद में बेच देने की जो trick आपको YouTube पर मिलती है, वो math में काम नहीं करती।
एक पुरानी दीवार भी यहाँ खड़ी है: Income Tax Act की Section 94(7), जिसे dividend stripping rule कहते हैं। ये record date से 3 महीने पहले ख़रीदकर 3 महीने के अंदर बेचने पर हुए loss को ignore कर देती है, बशर्ते उस पर मिला dividend tax-free हो। चूँकि 2020 के बाद dividend आपके हाथ में taxable हो चुका है, ये section अब equity dividend पर आम तौर पर लागू नहीं होती। पर mutual fund units और exempt income वाले cases में इसका दम अब भी बाक़ी है, इसलिए इसे भूलिए मत।
Interim, final और special dividend
तीनों नाम आपको announcements में मिलेंगे, और फ़र्क़ बस timing और मंज़ूरी का है:
- Interim dividend — financial year बीच में ही, board अपने अधिकार से declare कर देता है। Shareholders की मंज़ूरी नहीं चाहिए।
- Final dividend — साल के audited results आने के बाद declare होता है और AGM में shareholders की मंज़ूरी के बाद ही दिया जाता है।
- Special dividend — किसी एक बार की घटना पर (जैसे कोई business बेचकर बड़ा cash आना)। ये हर साल दोहराया नहीं जाता, इसलिए इसे yield के हिसाब में शामिल करके भविष्य का अंदाज़ा लगाना ग़लती है।
Tax तीनों पर एक जैसा लगता है। फ़र्क़ सिर्फ़ process का है, आपकी जेब का नहीं।
Dividend yield और payout ratio — दो नंबर जो सब कुछ बताते हैं
Dividend yield बताती है कि आज के भाव पर share खरीदने वाले को dividend से कितने प्रतिशत मिल रहा है:
| Formula | |
|---|---|
| Dividend yield | (साल भर का per-share dividend ÷ आज का share price) × 100 |
| Dividend payout ratio | (कुल dividend ÷ कुल net profit) × 100 |
₹400 के share पर साल में ₹16 का dividend मतलब 4% yield. सुनने में FD जैसा लगता है, पर है नहीं — FD में मूलधन तय है, यहाँ share का price आधा भी हो सकता है।
और अब वो जाल जिसमें मैंने अपने एक दोस्त को गिरते देखा है, इसलिए ये लिख रहा हूँ। Yield का formula देखिए: price नीचे है तो yield अपने आप ऊपर दिखेगी। जिस कंपनी का business बिगड़ रहा है, उसका share गिरता है, और screener पर उसकी yield 8-9% चमकने लगती है। लोग “high dividend stock” समझकर घुस जाते हैं, और अगले साल कंपनी dividend घटा देती है या बंद कर देती है। तब price भी गिरा हुआ है और dividend भी नहीं।
इसीलिए yield अकेले कभी मत देखिए। साथ में payout ratio देखिए। अगर कंपनी अपने पूरे मुनाफ़े का 90-100% बाँट रही है, तो एक बुरा साल आते ही dividend कटना तय है। 30-60% का payout आम तौर पर टिकाऊ माना जाता है। और सबसे भरोसेमंद signal है लगातार 8-10 साल का dividend record — नारा नहीं, history.
Dividend पर tax — FY 2026-27 में असल में क्या लगता है
2020 से पहले कंपनी ख़ुद Dividend Distribution Tax (DDT) भरती थी और आपके हाथ में आने वाला dividend ₹10 लाख तक tax-free होता था। Finance Act 2020 ने वो पूरा system पलट दिया। अब पूरा बोझ आपके सिर पर है:
| बात | FY 2026-27 का नियम |
|---|---|
| Dividend पर tax rate | कोई अलग rate नहीं — आपकी income में जुड़कर slab rate पर tax |
| Exemption limit | कोई नहीं; ₹1 का dividend भी taxable है |
| TDS (Section 194) | एक कंपनी से एक FY में ₹10,000 से ज़्यादा पर 10% |
| PAN न दिया हो तो TDS | 20% |
| ITR में कहाँ | Income from Other Sources; Form 26AS/AIS में TDS दिखता है |
| Interest expense deduction | FY 2026-27 से पूरी तरह बंद (नीचे detail) |
TDS की limit 1 April 2025 से ₹5,000 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रति कंपनी प्रति financial year की गई थी, और FY 2026-27 में भी यही चल रही है।
एक उदाहरण से साफ़ हो जाएगा। मान लीजिए किसी एक कंपनी से आपको साल भर में ₹12,000 dividend मिला। ₹10,000 की limit पार हुई, इसलिए कंपनी 10% यानी ₹1,200 काटकर ₹10,800 आपके account में भेजेगी। ITR भरते वक़्त पूरा ₹12,000 income में दिखाना है, और ₹1,200 का credit आपको मिल जाएगा। अगर आपकी कुल income taxable limit से नीचे है, तो ये ₹1,200 refund होकर वापस आ जाता है — वैसे ही जैसे बाक़ी TDS refund मिलता है। TDS कटने ही न दे, इसके लिए कंपनी या उसके RTA को Form 15G (60 से कम उम्र) या Form 15H (senior citizen) साल की शुरुआत में देना पड़ता है, बशर्ते आपकी income सच में limit से नीचे हो।
अब वो बदलाव जो इस साल नया है और अभी लगभग किसी guide में नहीं मिलेगा। पहले अगर आपने shares खरीदने के लिए उधार लिया था, तो उस पर दिए गए interest को dividend income में से घटाया जा सकता था, ज़्यादा से ज़्यादा dividend के 20% तक। Finance Act 2026 ने ये deduction tax year 2026-27 से पूरी तरह ख़त्म कर दिया है — यानी अब dividend income के ख़िलाफ़ कोई भी interest expense claim नहीं होगा। जिन लोगों ने margin या loan लेकर dividend-heavy portfolio बनाया है, उनके लिए ये सीधा असर वाला बदलाव है। (अपवाद सिर्फ़ वहाँ है जहाँ shares का काम business income की तरह दिखाया जाता है।)
अपनी slab की पूरी तस्वीर देखनी हो तो new vs old regime वाला guide और Income Tax Calculator साथ में खोलकर देख लीजिए — dividend उसी कुल income में जुड़कर आपका slab तय करता है।
Buyback अब dividend नहीं रहा — 1 April 2026 का बदलाव
Dividend के अलावा कंपनी shareholders को पैसा लौटाने का दूसरा रास्ता भी अपनाती है: buyback, यानी अपने ही shares वापस ख़रीदना। इसका tax पिछले दो सालों में दो बार बदल चुका है, और यही वजह है कि internet पर पड़े ज़्यादातर articles अब ग़लत जानकारी दे रहे हैं।
| Buyback कब हुआ | Tax कैसे लगा |
|---|---|
| 1 October 2024 से 31 March 2026 तक | पूरी buyback राशि “deemed dividend” — slab rate पर tax; shares की cost एक notional capital loss बन जाती थी |
| 1 April 2026 से आगे | Capital gains — tax सिर्फ़ (buyback price − cost) पर: 12 महीने तक STCG 20%, उसके बाद LTCG 12.5% (₹1.25 लाख की सालाना छूट के साथ) |
मतलब साफ़ है: अगर आपने 2025 में पढ़े हुए किसी article के भरोसे buyback की planning की है, तो number दोबारा लगाइए।
आपका dividend कहीं IEPF में तो नहीं फँसा है?
ये वो हिस्सा है जो मुझे सबसे ज़रूरी लगता है, और जो लगभग कोई नहीं बताता। ख़ास तौर पर उनके लिए जिनके पास पुराने shares हैं, या घर में पापा-दादाजी के नाम के shares पड़े हैं।
Companies Act, 2013 की Section 124 और IEPF Rules, 2016 कहते हैं: जो dividend आपने 7 साल तक claim नहीं किया, वो Investor Education and Protection Fund (IEPF) में चला जाता है। और सिर्फ़ dividend नहीं — जिन shares पर लगातार सात साल dividend unclaimed रहा, वो shares भी IEPF authority के demat account में transfer हो जाते हैं।
ये कोई theory नहीं है, अभी चल रहा है। FY 2018-19 के जो final dividend आज तक unclaimed पड़े हैं, वो कंपनियाँ 31 October 2026 के आसपास IEPF को transfer कर रही हैं, और उनके साथ जुड़े shares भी।
सबसे आम वजहें, मेरे देखे हुए क्रम में:
- Demat account में जुड़ा bank account बंद हो चुका है, dividend bounce हो गया।
- Bank ने merger के बाद IFSC बदल दिया और record update नहीं हुआ।
- Physical shares हैं, पता पुराना है, warrant डाक में ही रह गया।
- Share किसी रिश्तेदार के नाम पर है जिनका निधन हो चुका है और transmission नहीं हुआ।
IFSC बदलने वाली वजह इतनी आम है कि उसे अलग से check कर लीजिए — merger के बाद किस बैंक का code बदला, ये merged bank IFSC codes वाली list में मिल जाएगा।
वापस लेने का रास्ता बंद नहीं होता, बस लंबा है। IEPF की website पर online Form IEPF-5 भरिए, acknowledgement का print लीजिए, notarised indemnity bond, PAN, Aadhaar, cancelled cheque, Client Master Report और entitlement का proof कंपनी के nodal officer को भेजिए। कंपनी verification report भेजती है, फिर IEPF authority refund release करती है। महीनों लगते हैं। इसलिए आसान रास्ता यही है कि साल में एक बार अपने demat account की bank details और अपनी holdings की dividend history देख लीजिए।
Dividend आपके account तक पहुँचता कैसे है
अगर shares demat में हैं (और आज लगभग सबके हैं), तो कुछ करने की ज़रूरत नहीं। Payment date पर कंपनी का RTA आपके demat account में registered bank details पर सीधे NEFT/direct credit कर देता है। Bank statement में कंपनी या RTA के नाम से entry आती है, और ज़्यादातर brokers की app में एक अलग corporate actions या dividends वाला section भी होता है जहाँ पूरा record दिखता है।
न आए तो क्रम ये है: पहले contract note से confirm कीजिए कि share record date तक settle हुआ था या नहीं (मेरी 2021 वाली ग़लती यहीं पकड़ में आती)। फिर demat account में bank details देखिए। उसके बाद कंपनी के RTA को लिखिए। तीनों में कुछ न मिले, तब IEPF वाला रास्ता देखिए।
Mutual fund का “dividend” अलग चीज़ है
एक आख़िरी confusion, क्योंकि दोनों जगह एक ही शब्द इस्तेमाल होता है। Mutual fund में जो पहले “dividend option” कहलाता था, SEBI ने 2021 में उसका नाम बदलकर IDCW (Income Distribution cum Capital Withdrawal) कर दिया — और नाम इसलिए बदला गया क्योंकि वो असल में मुनाफ़े का हिस्सा नहीं, आपकी अपनी NAV में से निकालकर दिया गया पैसा है। Payout के बाद NAV उतनी घट जाती है। Share का dividend कंपनी के मुनाफ़े से आता है, IDCW आपकी अपनी investment में से।
लंबे समय के लिए पैसा बढ़ाना है तो growth option ही समझदारी है। पूरा फ़र्क़ mutual fund क्या है वाले guide में है, और अगर आप अभी share market समझना शुरू कर रहे हैं तो share market क्या है से शुरू कीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Dividend kya hota hai — simple bhasha me?
Dividend कंपनी के मुनाफ़े का वो हिस्सा है जो कंपनी अपने पास रखने के बजाय shareholders में बाँट देती है। आप जितने shares रखते हैं, per-share घोषित rate उतनी बार आपको मिलता है। यही dividend meaning in Hindi है — “लाभांश”, यानी profit का अंश। ज़रूरी बात: ये कोई bonus या मुफ़्त का पैसा नहीं है, कंपनी की जेब से निकलकर आपकी जेब में आता है, इसलिए ex-date पर share का price भी लगभग उतना ही गिर जाता है।
Dividend lene ke liye share kab tak kharidna padta hai?
India में T+1 settlement लागू होने के बाद ex-date और record date एक ही दिन होते हैं। इसका मतलब: dividend पाने के लिए आपको record date से कम-से-कम एक trading day पहले share खरीदना होगा, ताकि record date तक share आपके demat account में settle हो चुका हो। Ex-date वाले दिन खरीदा गया share dividend के लिए eligible नहीं होता — ये वही जगह है जहाँ सबसे ज़्यादा नए investors फँसते हैं।
Dividend par kitna tax lagta hai FY 2026-27 me?
Dividend आपकी कुल income में जुड़ता है और आपके income tax slab के हिसाब से tax लगता है — कोई अलग flat rate नहीं। 30% slab वाले के लिए ₹10,000 का dividend मतलब ₹3,000 (+cess) का tax। साथ ही अगर किसी एक कंपनी से एक financial year में ₹10,000 से ज़्यादा dividend मिला, तो कंपनी Section 194 के तहत 10% TDS काटकर बाक़ी पैसा भेजती है (PAN नहीं दिया तो 20%)। वो कटा हुआ TDS आपके Form 26AS/AIS में दिखता है और ITR में adjust हो जाता है।
Dividend yield kya hota hai aur kitna acha mana jata hai?
Dividend yield = (एक साल का per-share dividend ÷ आज का share price) × 100. मान लीजिए share ₹400 का है और साल भर में ₹16 dividend मिला, तो yield 4% हुई। Indian large-cap market में 1-3% आम है, 5-6% से ऊपर की yield अक्सर इसलिए दिखती है क्योंकि share का price गिर चुका है, न कि इसलिए कि कंपनी उदार है। सिर्फ़ ऊँची yield देखकर share खरीदना सबसे पुराना जाल है।
Interim dividend aur final dividend me kya fark hai?
Interim dividend financial year के बीच में board of directors घोषित करता है, बिना shareholders की मंज़ूरी का इंतज़ार किए। Final dividend साल ख़त्म होने के बाद, audited results के आधार पर घोषित होता है और AGM में shareholders की मंज़ूरी के बाद ही मिलता है। Tax दोनों पर एक जैसा लगता है। कुछ कंपनियाँ एक ही साल में दोनों देती हैं, कुछ सिर्फ़ एक, और कई अच्छी growth कंपनियाँ जानबूझकर कोई dividend नहीं देतीं।
Dividend account me nahi aaya to kya kare?
पहले record date दोबारा check कीजिए और अपना contract note देखिए कि share record date से पहले settle हुआ था या नहीं। उसके बाद भी न आया हो तो कंपनी के RTA (Registrar and Transfer Agent) से संपर्क कीजिए और अपने demat account में bank details तथा IFSC updated हैं या नहीं, ये confirm कीजिए — पुराना बंद हो चुका bank account सबसे आम वजह है। और सबसे ज़रूरी: अगर dividend लगातार 7 साल unclaimed रह गया, तो dividend ही नहीं, आपके shares भी IEPF में transfer हो जाते हैं। तब IEPF-5 form भरकर वापस लेना पड़ता है।
Buyback aur dividend me ab kya fark hai?
1 October 2024 से 31 March 2026 तक buyback का पूरा पैसा “deemed dividend” माना जाता था और आपके slab rate पर tax लगता था। 1 April 2026 से ये नियम बदल चुका है — अब buyback capital gains के हिसाब से tax होता है, यानी tax सिर्फ़ आपके असली फ़ायदे (buyback price घटा cost) पर लगता है। इसीलिए 2025 में लिखे हुए ज़्यादातर buyback articles अब outdated हैं।
एक लाइन में जो मैंने ₹2,250 गँवाकर सीखा था: dividend कोई अलग कमाई नहीं है, वो आपके ही निवेश का एक हिस्सा है जो नक़द में बाहर निकल आता है। Share इसलिए चुनिए कि कंपनी अच्छी है, इसलिए नहीं कि अगले हफ़्ते record date है।
Pakke Sources — हमने कहाँ से verify किया
- NSE India — T+1 settlement cycle — Jan 2023 se sabhi listed securities T+1 par; isi wajah se ex-date aur record date same day
- Income Tax Department — dividend taxation & Section 194 TDS — Slab-rate taxation (Finance Act 2020 se), TDS threshold ₹10,000 per company per FY (1 Apr 2025 se)
- Ministry of Corporate Affairs — IEPF — Section 124 Companies Act 2013 + IEPF Rules 2016; 7-saal unclaimed dividend aur shares ka transfer, Form IEPF-5 claim process
- SEBI — IDCW naming for mutual fund plans — “Dividend option” ka naam badal kar Income Distribution cum Capital Withdrawal (2021)