ITR File Kaise Kare? Form चुनने से लेकर E-Verify तक, पूरा Process

दो साल पहले मम्मी का ITR भरते समय एक बात ने मुझे रोक दिया था। उनके एक बैंक की FD का ब्याज AIS में पूरा नहीं, बस तीन महीने का दिख रहा था — बैंक ने बाकी हिस्सा देर से report किया था। अगर मैं आंख बंद करके AIS पर भरोसा कर लेती, तो बाकी ब्याज कभी return में आता ही नहीं। मैंने bank statement निकालकर पूरे साल का ब्याज खुद जोड़ा, तब सही number मिला। AIS शुरुआती सुराग है, आख़िरी सच नहीं — यही एक आदत आज इस पूरे article की सबसे बड़ी सीख है।
ITR फाइल करना उतना डरावना नहीं है जितना पहली बार में लगता है — बस एक तय क्रम में चलना होता है: सही form चुनना, documents पहले से इकट्ठे रखना, portal पर एक-एक schedule भरना, और आख़िर में e-verify करना। नीचे यही पूरा रास्ता है — कोई portal का screenshot नहीं, बस साफ़ शब्दों में हर step।
Pakka Points
- ITR-1 सिर्फ salary/pension वालों के लिए है — अब उसमें छोटा capital gain (₹1.25 लाख तक) भी शामिल हो सकता है
- Salary के साथ बड़ा capital gain हो तो ITR-2 लगता है, business या intraday/F&O जैसी speculative income हो तो ITR-3
- AY 2026-27 में ITR-1 और ITR-2 की आख़िरी तारीख़ 31 July 2026 थी, ITR-3 और ITR-4 (बिना audit) की 31 August 2026 है
- देर से भरने पर Section 234F के तहत ₹1,000 या ₹5,000 की late fee लगती है
- Filing के बाद 30 दिन के अंदर e-verify करना ज़रूरी है, वरना return को कभी भरी ही नहीं गई माना जाता है
कौन सा ITR Form आपके लिए है
पहले एक छोटी सी बात साफ़ कर लेते हैं। जो income April 2025 से March 2026 के बीच कमाई गई, उसे Financial Year 2025-26 कहा जाता है, और उसी का हिसाब जिस साल भरा जाता है उसे Assessment Year यानी AY 2026-27 कहा जाता है। इस article में जहां भी AY 2026-27 लिखा है, वो इसी साल की filing की बात कर रहा है।
अब असली सवाल — नीचे तीन forms का वो फ़र्क़ है जो सबसे ज़्यादा लोगों के काम आता है। ये general rules हैं, हर case की अपनी बारीकियां हो सकती हैं:
| ITR Form | किसके लिए | कब नहीं |
|---|---|---|
| ITR-1 (Sahaj) | सिर्फ salary/pension, एक-दो घर (किराए सहित), FD/saving interest — total income ₹50 लाख तक, छोटा capital gain भी अब शामिल | Business/professional income, बड़ा capital gain, company में director, या foreign asset/income |
| ITR-2 | Salary के साथ capital gains (शेयर, mutual fund, property), एक से ज़्यादा घर, foreign asset — business/professional income नहीं | Business या professional income हो, चाहे presumptive scheme में ही क्यों न हो |
| ITR-3 | Business या profession से income — intraday और F&O जैसी speculative income भी इसी में आती है | सिर्फ salary और capital gains हों तो ज़रूरत नहीं, वहां ITR-2 काफ़ी है |
छोटे business/professional जो presumptive scheme (Section 44AD/44ADA) में आते हैं, वो अक्सर ITR-4 (Sugam) भरते हैं — ITR-3 सिर्फ तभी ज़रूरी है जब presumptive scheme लागू न हो या turnover उसकी सीमा से ऊपर हो।
ITR-1 वाली capital-gain छूट AY 2025-26 से जुड़ी है — Section 112A के तहत long-term capital gain अगर ₹1.25 लाख से कम हो और कोई carried-forward loss न हो, तभी ITR-1 चल पाता है। इससे एक रुपया भी ज़्यादा गेन हो, तो सीधा ITR-2 पर जाना पड़ता है।
जो लोग intraday trading करते हैं, उनकी उससे हुई कमाई कानून की नज़र में speculative business income मानी जाती है — चाहे बाक़ी income सिर्फ salary से ही क्यों न आती हो, फिर भी ITR-3 ही भरना पड़ता है। Margin, STT और tax का पूरा फ़र्क़ हमारे Intraday vs Delivery Trading वाले article में है — वहां यही point विस्तार से समझाया गया है।
Documents पहले तैयार कर लीजिए
Pehle likh lijiye: ये सात चीज़ें, filing शुरू करने से पहले हाथ में होनी चाहिए —
- Form 16 — employer से मिलने वाला salary और TDS का certificate
- Form 26AS — TDS, TCS और advance tax का consolidated record, e-filing portal से मिलता है
- AIS (Annual Information Statement) और TIS — bank interest, dividend, mutual fund और शेयर की खरीद-बिक्री जैसी हर वो जानकारी जो आपके PAN से जुड़कर विभाग तक पहुंचती है, यहां इकट्ठी दिखती है
- पूरे साल का bank statement — interest के number मिलाने के लिए
- Capital gains statement — शेयर/F&O के लिए broker का Tax P&L, mutual fund के लिए AMC या RTA का capital-gains statement
- PAN और Aadhaar — दोनों आपस में link होने चाहिए
- Old regime चुनना हो तो — home loan interest certificate, insurance premium receipt, rent receipt जैसे proofs भी साथ रखिए
Regime चुनना मत भूलिए
Documents जमा करते वक़्त ही एक फ़ैसला साथ में सोच लीजिए — new regime या old regime। ITR form में यही चुनाव पूछा जाता है, और salary वाले हर साल बदल भी सकते हैं। Slabs, rebate और breakeven का पूरा हिसाब हमारे New Tax Regime vs Old Tax Regime वाले article में है — ITR भरने से पहले एक बार वहां देख लीजिए।
ITR भरने का पूरा Process — Step by Step
यहां कोई portal screenshot नहीं है — पर हर step उतना ही साफ़ है, शब्दों में:
- Portal पर login कीजिए — PAN से e-filing portal पर account पहले से हो तो login कीजिए, नहीं तो पहले register कीजिए।
- सही Assessment Year चुनिए — इस साल की income के लिए AY 2026-27 चुनना है, पुराना साल गलती से न चुन लें।
- ITR form select कीजिए — ऊपर वाले table के हिसाब से अपना form चुनिए। Portal खुद भी एक सुझाव देता है, पर सही form कौन सा है ये आख़िर में आपको ही तय करना है।
- Pre-filled data मिलाइए — Form 26AS और AIS से data अपने आप आ जाता है, पर हर आंकड़े को अपने Form 16, bank statement और capital-gains statement से मिलाकर देखिए — पहली नज़र में सही लगे तो भी।
- हर schedule भरिए — salary, house property, capital gains, other sources, और deductions (जो regime चुनी है उसके हिसाब से) — एक-एक करके।
- Tax computation चेक कीजिए — portal खुद हिसाब लगाता है कि tax बाकी है या refund बनता है, इसे एक बार खुद भी verify कर लीजिए।
- Preview करके submit कीजिए — पूरा form एक बार दोबारा पढ़िए, फिर ही submit के button तक जाइए।
- 30 दिन के अंदर e-verify कीजिए — submit होते ही filing पूरी नहीं होती, verify किए बिना return अधूरी मानी जाती है। तरीक़े अगले section में हैं।
Deadline और देरी की Penalty — Section 234F
Form जितना ज़रूरी है, तारीख़ उतनी ही। AY 2026-27 के लिए हर तरह के filer की अपनी deadline है:
| Filer | आख़िरी तारीख़ (AY 2026-27) |
|---|---|
| ITR-1, ITR-2 (बिना audit) | 31 July 2026 |
| ITR-3, ITR-4 (बिना audit) | 31 August 2026 |
| Audit वाले cases (Section 44AB) | 31 October 2026 |
| Belated return (late fee के साथ) | 31 December 2026 |
स्रोत: Income Tax Department, incometaxindia.gov.in (verified Aug 2026)। तारीख़ में बदलाव या extension हो सकता है — official notification आने पर ये article उसी हफ़्ते update होगा।
अगर आप ये article 31 July के बाद पढ़ रहे हैं और आपका form ITR-1 या ITR-2 है, तो घबराने की बात नहीं — return अब भी भरी जा सकती है, बस उसे belated return कहा जाएगा और नीचे वाली fee लगेगी। ज़्यादा देर करने से fee नहीं बढ़ती (वो एक fix amount है), पर बिल्कुल न भरने का risk उससे कहीं बड़ा है।
| Total income | Late fee (Section 234F) |
|---|---|
| ₹5 लाख तक | ₹1,000 |
| ₹5 लाख से ज़्यादा | ₹5,000 |
| Basic exemption limit से कम (filing ज़रूरी ही नहीं थी) | ₹0 — fee सिर्फ उन पर लगती है जिनके लिए filing ज़रूरी थी |
Section 234F, Income-tax Act, 1961 — AY 2026-27 के return पर यही लागू है। ध्यान रहे: नया Income-tax Act, 2025 (1 April 2026 से लागू) में यही provision Section 428 के नाम से आएगा, पर FY 2025-26 की income के लिए पुराना Section 234F ही चलता है। इसके अलावा बकाया tax पर ब्याज अलग से जुड़ सकता है — वो इस fee से अलग हिसाब है।
E-Verify कैसे करें — 4 तरीक़े
Return submit करना आधा काम है — बिना e-verify किए वो पूरी नहीं मानी जाती। चार तरीक़े मिलते हैं:
- Aadhaar OTP — सबसे आसान तरीक़ा, Aadhaar से link मोबाइल नंबर पर OTP आता है, डालते ही verify हो जाता है।
- Net banking — अपने bank के net banking में login करके वहां से e-filing portal तक पहुंचिए, सीधा verify हो जाता है।
- EVC (Electronic Verification Code) — pre-validated bank account या demat account के ज़रिए एक code generate होता है, वही डालकर verify कीजिए।
- Physical ITR-V — अगर ऊपर के तीनों में से कोई तरीक़ा इस्तेमाल नहीं करना, तो ITR-V print करके नीली स्याही से sign कीजिए और ordinary या speed post से CPC (Centralized Processing Centre), Bengaluru भेजिए — courier से नहीं भेजा जा सकता।
ये चारों तरीक़े एक ही समय-सीमा से बंधे हैं — filing की तारीख़ से 30 दिन। ये rule 1 August 2022 से लागू है (CBDT की DGIT-Systems Notification No. 5/2022, dated 29 July 2022) — उससे पहले 120 दिन मिलते थे। 30 दिन के अंदर verify नहीं किया तो return को कभी भरी ही नहीं गई माना जाता है, और दोबारा upload करके फिर से 30 दिन के अंदर verify करना पड़ता है। देरी की सही वजह हो तो condonation request डाली जा सकती है, पर उसे मंज़ूरी देना या न देना विभाग की मर्ज़ी पर है।
Notice आने की सबसे आम वजहें
ज़्यादातर notice किसी छुपाने की कोशिश से नहीं, भूलने या जल्दबाज़ी से आते हैं। जो जानकारी आपके PAN से पहले ही जुड़ी हुई है, उसे return में छोड़ देने से क्या फ़ायदा — विभाग के पास तो वो पहले से ही है?
- Form 26AS/AIS और return का mismatch — जो income या TDS record में पहले से है, वही return में न दिखे तो processing के वक़्त automated mismatch notice (Section 143(1)(a)) आ सकता है।
- Bank interest report न करना — छोटी FD या saving account का interest अगर TDS की सीमा से कम है तब भी वो taxable income है, report करना ज़रूरी है — TDS न कटना और tax न लगना, दो अलग बातें हैं।
- Capital gains भूल जाना — पुराने शेयर बेच दिए, mutual fund redeem किया, राशि कितनी भी छोटी हो — broker और RTA दोनों ये जानकारी विभाग तक पहुंचाते हैं, देर-सवेर AIS में आ ही जाती है।
- ग़लत ITR form चुनना — जैसे intraday की income को ITR-2 में डाल देना — इससे defective-return notice (Section 139(9)) आने का ख़तरा रहता है।
मम्मी वाला वो अधूरा AIS आज भी याद है — portal जितना smart होता जा रहा है, अपनी जांच उतनी ही ज़रूरी बनी रहती है। सही form, तैयार documents, और आख़िर में e-verify — बस यही तीन चीज़ें एक साफ़-सुथरी filing बनाती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मेरी सिर्फ salary है, कौन सा ITR form भरूं?
अगर सिर्फ salary या pension income है, एक-दो घर हैं (किराए सहित), और थोड़ी-बहुत bank interest जैसी other-sources income है, तो ITR-1 (Sahaj) काफ़ी है — बशर्ते total income ₹50 लाख से कम हो। अब इसमें छोटा capital gain भी चल जाता है, अगर वो Section 112A के तहत ₹1.25 लाख से कम हो और कोई carried-forward loss न हो। इससे ज़्यादा capital gain हो, या कोई short-term capital gain भी शामिल हो, तो ITR-2 भरना पड़ता है।
Intraday trading करता हूं, कौन सा ITR form भरूं?
Intraday trading से हुई कमाई को कानून speculative business income मानता है (Section 43(5) के तहत) — चाहे बाक़ी income सिर्फ salary से ही क्यों न आती हो। इसलिए ITR-3 भरना ज़रूरी है, ITR-1 या ITR-2 से काम नहीं चलेगा। Delivery वाले शेयरों का capital gain अलग बात है, वो ITR-2 में ही आ जाता है।
31 July निकल गई, अब ITR-1 या ITR-2 कैसे भरूं?
अब भी भरी जा सकती है — इसे belated return कहा जाता है, और 31 December 2026 तक भरने का मौका रहता है। बस Section 234F के तहत late fee लगती है (income के हिसाब से ₹1,000 या ₹5,000), और अगर tax बकाया है तो उस पर ब्याज अलग से जुड़ता है। बिल्कुल न भरने से यह हमेशा बेहतर विकल्प है।
E-verify नहीं किया तो क्या होगा?
Filing की तारीख़ से 30 दिन के अंदर e-verify करना (या physical ITR-V post से भेजना) ज़रूरी है। ऐसा न हो तो return को कभी भरी ही नहीं गई माना जाता है — दोबारा upload करके फिर से 30 दिन के अंदर verify करना पड़ता है। देरी की सही वजह हो तो condonation request डाली जा सकती है, पर उसे मंज़ूरी देना या न देना विभाग की मर्ज़ी पर है, गारंटी नहीं।
AIS और Form 26AS में क्या फ़र्क़ है?
Form 26AS में मुख्यतः वही टैक्स दिखता है जो income पर पहले ही कट या जमा हो चुका है — TDS, TCS, advance tax। AIS उससे बड़ा document है — उसमें bank interest, dividend, mutual fund और शेयर की खरीद-बिक्री, property transaction जैसी बहुत सी financial जानकारी भी होती है, चाहे उस पर TDS कटा हो या नहीं। ITR भरने से पहले दोनों को bank statement और capital-gains statement से मिलाकर देखना चाहिए।
Income taxable limit से कम है, फिर भी ITR भरना ज़रूरी है क्या?
अगर income basic exemption limit से कम है, तो ज़्यादातर मामलों में ITR भरना ज़रूरी नहीं होता, और ऐसे में देर होने पर Section 234F भी लागू नहीं होती। फिर भी कई बार भरना फ़ायदेमंद रहता है — जैसे किसी loan या visa application के लिए income-proof चाहिए हो, या TDS कट चुका हो और refund क्लेम करना हो।
Pakke Sources — हमने कहाँ से verify किया
- Income Tax Department — ITR forms, due dates aur Section 234F — ITR-1/2/3/4 applicability, AY 2026-27 deadlines, late-filing fee — verified Aug 2026
- Income Tax e-Filing Portal — 30 Days' Timeline for E-verification (FAQs) — CBDT DGIT(Systems) Notification No. 5/2022, dated 29 July 2022 — 120 din se ghatakar 30 din, w.e.f. 1 Aug 2022
- ClearTax — ITR Filing Last Date FY 2025-26 (AY 2026-27) — ITR-1/ITR-2 — 31 July 2026, ITR-3/ITR-4 (non-audit) — 31 August 2026 — verified Aug 2026