HRA Exemption कैसे लें (HRA Exemption Kaise Le)? पूरा हिसाब और 2026 के नियम

HRA यानी House Rent Allowance — तनख़्वाह का वह हिस्सा जो किराये के लिए मिलता है। पूरा HRA कर-मुक्त नहीं होता; उसका एक हिस्सा ही छूट में आता है, और वो हिस्सा एक तय गणित से निकलता है।
2026 में इस विषय पर सिर्फ़ formula जान लेना काफ़ी नहीं रह गया है। आयकर विभाग अब हर दावे को bank record, मकान-मालिक के PAN और उनके अपने ITR से मिलाकर देखता है। इसलिए यह लेख दो हिस्सों में है — पहले पूरा हिसाब, फिर वो काग़ज़ी शर्तें जिनके बिना सही दावा भी अटक जाता है।
Pakka Points
- छूट = तीन रक़मों में से सबसे कम — असल HRA, किराया घटा basic का 10%, और metro में basic का 50% / अन्यत्र 40%।
- Metro सिर्फ़ चार — दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई। बेंगलुरु और पुणे इस नियम में non-metro हैं।
- साल भर का किराया ₹1 लाख से ऊपर — मकान-मालिक का PAN देना अनिवार्य, वरना नियोक्ता छूट नहीं देगा।
- महीने का किराया ₹50,000 से ऊपर — किराएदार को 2% TDS काटकर Form 26QC से जमा करना होगा (अक्टूबर 2024 से 5% घटकर 2%)।
- माता-पिता को किराया देना वैध है — पर बैंक से भेजिए, समझौता लिखवाइए, और उन्हें अपने ITR में दिखाना होगा।
- नक़ली रसीदें अब AI-आधारित मिलान में पकड़ी जाती हैं — misreporting पर कर की 200% तक पेनल्टी।
- HRA की छूट सिर्फ़ old regime में; HRA न मिलता हो तो धारा 80GG, वो भी old regime में ही।
पूरा हिसाब — तीन में से सबसे कम
एक उदाहरण से देखिए। मान लीजिए basic salary ₹50,000 प्रति माह है, HRA ₹20,000 प्रति माह मिलता है, और आप पुणे में ₹18,000 प्रति माह किराये पर रहते हैं।
| गणना | कैसे निकली | सालाना राशि |
|---|---|---|
| 1. असल में मिला HRA | ₹20,000 × 12 | ₹2,40,000 |
| 2. किराया घटा basic का 10% | (₹18,000 × 12) − (₹6,00,000 × 10%) | ₹1,56,000 |
| 3. Basic का 40% (non-metro) | ₹6,00,000 × 40% | ₹2,40,000 |
| छूट = तीनों में सबसे कम | — | ₹1,56,000 |
| कर-योग्य HRA | ₹2,40,000 − ₹1,56,000 | ₹84,000 |
वही व्यक्ति अगर दिल्ली में होता तो तीसरी पंक्ति ₹3,00,000 बनती — पर छूट फिर भी ₹1,56,000 ही रहती, क्योंकि दूसरी पंक्ति सबसे कम है। यही वजह है कि metro में रहने से हमेशा ज़्यादा छूट नहीं मिलती; असली सीमा अक्सर किराये वाली दूसरी पंक्ति ही होती है।
दो बारीकियाँ, जो अक्सर ग़लत की जाती हैं। पहली — 50%/40% वाला हिसाब आप कहाँ रहते हैं उससे तय होता है, दफ़्तर कहाँ है उससे नहीं। दूसरी — DA को basic में तभी जोड़ा जाता है जब वो retirement benefits की गणना में आता हो; निजी क्षेत्र में आम तौर पर नहीं आता। साल के बीच में शहर या किराया बदले तो हिसाब महीनों के हिसाब से टुकड़ों में करना होता है, पूरे साल के औसत पर नहीं।
दो सीमाएँ, जो अलग-अलग हैं — और लोग एक समझ लेते हैं
| सीमा | कब लागू | क्या करना है | किसकी ज़िम्मेदारी |
|---|---|---|---|
| ₹1,00,000 सालाना | साल भर का कुल किराया इससे ऊपर | मकान-मालिक का PAN नियोक्ता को देना | कर्मचारी |
| ₹50,000 मासिक | महीने का किराया इससे ऊपर | 2% TDS काटकर Form 26QC से जमा करना | किराएदार |
दूसरी पंक्ति चौंकाती है — TDS काटने की ज़िम्मेदारी किराएदार की है, चाहे वो salaried व्यक्ति ही क्यों न हो। TAN की ज़रूरत नहीं होती, PAN से काम चल जाता है। चूक होने पर ब्याज और शुल्क किराएदार पर लगते हैं, मकान-मालिक पर नहीं।
Pehle likh lijiye: ₹8,400 प्रति माह से ऊपर का किराया साल भर में ₹1 लाख की सीमा पार कर देता है। यानी छोटे शहरों में भी PAN वाला नियम लागू हो जाता है। मकान-मालिक PAN देने से मना करे तो उनसे उनके नाम-पते और PAN न होने की लिखित घोषणा लीजिए — पर सच यह है कि ज़्यादातर नियोक्ता उसे स्वीकार करने में हिचकते हैं, और तब पूरा HRA कर-योग्य मान लिया जाता है।
2026 की जाँच — रसीदें अब अकेली काफ़ी नहीं
यह हिस्सा ध्यान से पढ़िए, क्योंकि पिछले दो सालों में यही सबसे ज़्यादा बदला है।
विभाग अब HRA के दावे को कई जगह से मिलाकर देखता है — आपके bank statement, UPI लेन-देन, मकान-मालिक के PAN और उनके अपने return से। सीधा उदाहरण: रसीदों में हर महीने ₹20,000 नक़द दिखा है, पर उन तारीख़ों के आसपास खाते से कोई निकासी या UPI भुगतान नहीं दिखता — यह विसंगति अपने आप चिह्नित हो जाती है। इसी तरह के मिलान में हज़ारों नक़ली किराया-रसीद वाले मामले पकड़े जा चुके हैं, और वे सिर्फ़ बड़े करदाताओं तक सीमित नहीं थे — MNC, PSU, सरकारी विभाग और शिक्षण संस्थानों के कर्मचारी सब उसमें शामिल थे।
ग़लत जानकारी देने पर बचाए गए कर की 200% तक पेनल्टी लग सकती है, ब्याज अलग से। इसलिए एक साधारण नियम बना लीजिए: किराया बैंक से भेजिए, हर महीने, उसी तारीख़ के आसपास जो समझौते में लिखी है। नक़द भुगतान अब सबसे कमज़ोर कड़ी है — भले ही वो पूरी तरह असली हो।
काग़ज़ों की सूची छोटी है: किराया समझौता, हर महीने की बैंक entry, रसीदें, मकान-मालिक का PAN, और नियोक्ता को दी गई घोषणा। ITR भरते वक़्त यही मिलान काम आएगा — पूरी प्रक्रिया ITR कैसे भरें में लिखी है, और salary slip के किस खाने में क्या देखना है वो Form 16 कैसे पढ़ें में।
माता-पिता को किराया — वैध है, पर तीन शर्तों के साथ
यह सवाल हर दूसरे पाठक का होता है, और जवाब हाँ है। पर तीनों शर्तें पूरी होनी चाहिए:
- मकान माता-पिता के नाम हो — आपके या संयुक्त नाम में हो तो दावा नहीं बनता।
- किराया बैंक खाते से जाए, हर महीने, और उसका एक लिखित समझौता हो।
- माता-पिता उस किराये को अपने ITR में आय के रूप में दिखाएँ।
सही ढंग से किया जाए तो यह परिवार के स्तर पर वाक़ई बचत करता है, क्योंकि किराये की आय पर 30% मानक कटौती मिलती है और माता-पिता अक्सर कम slab में या कर-मुक्त सीमा के भीतर होते हैं। Papa की फ़ाइल में यही करते वक़्त एक चीज़ छूट गई थी — पहले साल समझौता बना ही नहीं था, सिर्फ़ transfer होते रहे। बाद में वो लिखवाना पड़ा, और उसी तारीख़ से लिखवाना पड़ा। समझौता पहले, transfer बाद में — यही सही क्रम है।
HRA और home loan, दोनों एक साथ
बहुत लोग मान लेते हैं कि अपना मकान होते ही HRA का दावा ख़त्म। ऐसा नहीं है। दोनों एक साथ लिए जा सकते हैं, बशर्ते हालात असली हों — जैसे मकान किसी दूसरे शहर में है और आप नौकरी के कारण किराये पर रह रहे हैं, या मकान इतनी दूर है कि वहाँ से रोज़ आना-जाना व्यावहारिक नहीं।
ऐसे मामलों में HRA की छूट अलग चलती है और home loan के ब्याज व मूलधन के लाभ अलग। पर शर्त यह है कि कारण वास्तविक हो और ज़रूरत पड़ने पर बताया जा सके — एक ही शहर में, एक ही इलाक़े में अपना ख़ाली मकान रखते हुए किराये का दावा सबसे जल्दी सवाल में आता है।
HRA मिलता ही नहीं? तब धारा 80GG
स्वरोज़गार करने वालों और उन कर्मचारियों के लिए जिनकी salary में HRA का खाना है ही नहीं, एक अलग रास्ता है। छूट इनमें से सबसे कम वाली होगी:
| गणना | सीमा |
|---|---|
| तय मासिक सीमा | ₹5,000 प्रति माह (₹60,000 सालाना) |
| कुल आय का हिस्सा | समायोजित कुल आय का 25% |
| किराया घटा आय का 10% | चुकाया गया किराया − समायोजित कुल आय का 10% |
शर्तें: आपके, जीवनसाथी या नाबालिग बच्चे के नाम उसी शहर में कोई आवासीय मकान न हो, और ITR के साथ Form 10BA दाख़िल करना ज़रूरी है। यह छूट भी सिर्फ़ old regime में मिलती है।
पहले यह तय कीजिए — कौन सा regime
सारा हिसाब लगाने के बाद भी अगर आप new regime में हैं, तो HRA की छूट शून्य है। HRA मिलता रहेगा, पर पूरा कर-योग्य होगा। यही बात 80GG, 80C और 80D पर भी लागू है।
इसलिए क्रम यह रखिए: पहले दोनों regimes की तुलना कीजिए, Income Tax Calculator पर अपनी संख्याएँ डालिए, और तब तय कीजिए कि HRA की काग़ज़ी मेहनत आपके लिए फ़ायदे की है या नहीं। बहुत से लोगों के लिए — ख़ास तौर पर जिनका किराया कम है — new regime की कम दरें ज़्यादा बचाती हैं। नए वित्त वर्ष की slab दरें यहाँ हैं, और अगर आप old regime चुनते हैं तो 80C का इस्तेमाल भी पूरा कीजिए।
एक आख़िरी बात, तारीख़ के साथ: HRA की छूट पहले धारा 10(13A) में थी। नए Income Tax Act, 2025 में, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू है, यह प्रावधान अब उन आयों वाले अध्याय में है जो कुल आय में शामिल नहीं होतीं। शर्तें और गणना वही हैं। और जैसा हर बार कहती हूँ — 2026 में जो ITR आप भर रहे हैं वो वित्त वर्ष 2025-26 का है, उसमें पुराने ही धारा-नंबर चलेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
HRA exemption ka formula kya hai?
तीन रक़में निकालिए और उनमें से सबसे कम वाली आपकी छूट है। पहली — साल भर में असल में मिला HRA। दूसरी — चुकाया गया किराया घटा basic salary (और DA, अगर वो retirement benefits में गिना जाता है) का 10%। तीसरी — metro शहर में रहते हैं तो basic का 50%, बाक़ी जगह 40%। ध्यान रहे कि तीसरी रक़म आपके रहने की जगह से तय होती है, दफ़्तर की जगह से नहीं।
Metro city me kaun se shahar aate hain?
HRA की गणना के लिए सिर्फ़ चार — दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई। बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, गुरुग्राम और नोएडा भले ही महँगे हों, इस नियम में वे non-metro ही गिने जाते हैं, यानी 40% वाली सीमा लगेगी। यह पुरानी परिभाषा है और 2026 तक इसमें बदलाव नहीं हुआ है।
Landlord ka PAN kab dena zaroori hai?
जब साल भर का किराया ₹1,00,000 से ऊपर हो। PAN या मकान-मालिक की वैध घोषणा न देने पर आपका नियोक्ता TDS की गणना में HRA की छूट नहीं देगा — और तब पूरा HRA कर-योग्य मान लिया जाता है। यह सीमा सालाना ₹1 लाख की है, महीने की नहीं; ₹8,400 प्रति माह का किराया भी साल भर में इस सीमा को पार कर जाता है।
₹50,000 se zyada kiraya hai to kya TDS katna padta hai?
हाँ, और यह ज़िम्मेदारी किराएदार की है, मकान-मालिक की नहीं। महीने का किराया ₹50,000 से ऊपर हो तो धारा 194-IB के तहत आपको 2% TDS काटकर Form 26QC से जमा करना होता है (यह दर अक्टूबर 2024 से 5% घटाकर 2% की गई है)। TAN की ज़रूरत नहीं, PAN से ही हो जाता है। यह वो नियम है जिसका पालन सबसे कम होता है, और चूक होने पर जुर्माना किराएदार पर लगता है।
Maa-baap ko kiraya dekar HRA claim kar sakte hain kya?
कर सकते हैं, यह पूरी तरह वैध है — पर तीन शर्तों के साथ। पहली, मकान माता-पिता के नाम होना चाहिए, आपके नाम नहीं। दूसरी, किराया सचमुच बैंक से जाना चाहिए, नक़द में नहीं। तीसरी, माता-पिता को वह किराया अपने ITR में आय के रूप में दिखाना होगा। सही ढंग से किया जाए तो यह परिवार के स्तर पर फ़ायदे का सौदा हो सकता है, क्योंकि किराये की आय पर 30% मानक कटौती मिलती है और माता-पिता अक्सर कम slab में होते हैं।
New tax regime me HRA milta hai kya?
नहीं। HRA की छूट सिर्फ़ old tax regime में है — new regime में HRA मिलता तो रहेगा, पर पूरा कर-योग्य होगा। यही बात धारा 80GG पर भी लागू है, जो उन लोगों के लिए है जिन्हें HRA मिलता ही नहीं। इसलिए regime चुनने से पहले अपना असली हिसाब लगाइए; कई मामलों में new regime की कम दरें HRA की छूट से ज़्यादा बचा देती हैं।
Pakke Sources — हमने कहाँ से verify किया
- Income Tax Department — House Rent Allowance — Teen me se sabse kam wala formula; metro 50% / non-metro 40%
- Income Tax Department — landlord PAN requirement — Saalana ₹1 lakh se upar kiraye par makan-malik ka PAN anivarya
- Income Tax Department — TDS on rent (Section 194-IB) — ₹50,000/mahina se upar par kirayedar dwara 2% TDS, Form 26QC (October 2024 se 5% ghatakar 2%)
- Income Tax Department — Section 80GG & Form 10BA — HRA na milne par kiraye ki chhut; sirf old regime me
- Income Tax Act, 2025 — 1 April 2026 se lagu; HRA ka pravdhan ab 'incomes not included in total income' wale adhyay me