Upper Circuit और Lower Circuit क्या होता है (Upper Circuit Lower Circuit Kya Hota Hai)?

सच बोलूँ? Circuit का मतलब मुझे theory से नहीं, नुक़सान से समझ आया। 2021 में एक smallcap था मेरे पास, 400 shares, average ₹96। एक बुरी ख़बर आई और अगली सुबह वो 5% lower circuit पर खुला। मैंने sell order डाला — नहीं लगा। दूसरे दिन फिर lower circuit, फिर तीसरे दिन। चार दिन तक मैं रोज़ 9:15 बजे बैठकर order डालता रहा और चारों दिन वो order pending में पड़ा रहा। जब पाँचवें दिन आख़िरकार बिका, तब तक ₹96 वाला share ₹71 का हो चुका था। पैसा गिरने से नहीं गया, निकलने का रास्ता बंद होने से गया।
यही circuit limit की असली कहानी है। Definition दो लाइन की है — upper circuit उस दिन की सबसे ऊँची क़ीमत है जिस पर वो share trade कर सकता है, lower circuit सबसे नीची। दोनों पिछले दिन के closing price से नापे जाते हैं और रोज़ रात reset हो जाते हैं। पर काम की बात वो नहीं है। काम की बात ये है कि circuit लगने पर आपके order का होता क्या है, और उससे बाहर निकलने के रास्ते कौन-कौनसे हैं।
Pakka Points
- Circuit limit हर दिन पिछले दिन के closing price से नापी जाती है, आज के open से नहीं
- Cash segment में bands 2%, 5%, 10% या 20% होती हैं — exchange surveillance के हिसाब से, SEBI के किसी एक fix rule से नहीं
- जिन stocks में F&O चलता है उनमें fixed circuit limit होती ही नहीं — वहाँ dynamic price band है जो दिन में कई बार चौड़ा होता है
- Upper circuit पर बेचना आसान है, ख़रीदना लगभग नामुमकिन — lower circuit पर बिल्कुल उल्टा
- 1 September 2026 से SEBI ने ETF के price band का पूरा system बदल दिया है — fix 20% की जगह dynamic ±10%
Circuit limit कैसे तय होती है — 2%, 5%, 10% या 20%
ज़्यादातर Hindi articles यहीं पर रुक जाते हैं कि "circuit 5%, 10% या 20% का होता है" और ये नहीं बताते कि किस share पर कौनसा लगेगा, ये तय कौन करता है। Framework SEBI का है, पर असली फ़ैसला NSE और BSE का surveillance department करता है — stock की हाल की volatility, average price movement और उसकी अपनी liquidity देखकर। Review आम तौर पर हर महीने होता है और बदलाव exchange के circular से आता है।
| Band | आम तौर पर किन shares पर | क्या समझें |
|---|---|---|
| 20% | बड़े, liquid, non-F&O cash stocks | सबसे चौड़ी standard band — exchange को इसमें कोई ख़तरा नहीं दिखता |
| 10% | मध्यम liquidity वाले stocks | थोड़ी निगरानी है, पर surveillance नहीं |
| 5% | हाल में तेज़ हिले हुए या ASM/GSM Stage I वाले stocks | Exchange ने जानबूझकर नकेल कसी है |
| 2% | ESM Stage II और सबसे ज़्यादा संदिग्ध scrips | यह exchange की लिखित चेतावनी है, इसे ignore मत कीजिए |
| कोई fixed band नहीं | जिन stocks में F&O contracts available हैं | इनमें dynamic price band चलता है, नीचे अलग section है |
Band का base हमेशा पिछले दिन का closing price होता है। ₹100 पर बंद हुए 10% band वाले share की उस दिन की range ₹90 से ₹110 रहेगी, चाहे वो ₹107 पर खुले या ₹92 पर।
एक चीज़ जो नए लोग नहीं जानते: 2% या 5% band अपने आप में एक signal है। वो share ASM, GSM या ESM list में है, यानी exchange को उसकी price movement उसकी असली financial सेहत से मेल खाती नहीं लग रही। ASM/GSM के Stage I में daily band 5% या उससे कम हो जाती है, और ESM Stage II में सिर्फ़ 2%। साथ में 100% margin और कभी-कभी periodic call auction भी लग जाता है — मतलब वो share दिन भर continuous trade ही नहीं करता, सिर्फ़ तय slots में। किसी tip पर share ख़रीदने से पहले NSE की surveillance list देख लेना दुनिया का सबसे सस्ता research है।
Upper circuit में share ख़रीदना क्यों नामुमकिन हो जाता है
ये समझने के लिए order book की तरफ़ देखना पड़ेगा, price की तरफ़ नहीं। Trade तभी होता है जब एक buyer और एक seller एक ही price पर मिलें। Upper circuit पर price कानूनन उससे ऊपर जा नहीं सकती, तो जिन लोगों को लगता है कि share और ऊपर जाएगा वो सब buy side पर खड़े हो जाते हैं और बेचने वाला कोई बचता नहीं।
नतीजा screen पर ऐसा दिखता है: buy quantity में लाखों shares की pending demand, और sell quantity में बिल्कुल 0. आपका buy order उस लाखों वाली कतार में सबसे पीछे लग जाता है। दिन भर वहीं पड़ा रहता है, और शाम को cancel हो जाता है। इसीलिए upper circuit वाले share में "बस थोड़ा और ऊपर लेकर बेच दूँगा" वाला plan काम नहीं करता — entry ही नहीं मिलती।
उल्टा भी उतना ही सच है। Upper circuit पर बेचना सबसे आसान काम है, क्योंकि ख़रीदारों की लंबी queue पहले से तैयार खड़ी है। अगर आपके पास वो share है और आप निकलना चाहते हैं, तो upper circuit वाला दिन आपका सबसे अच्छा exit है, सबसे बुरा नहीं।
Lower circuit का असली डर — रास्ता बंद हो जाना
मेरे 2021 वाले case में यही हुआ था। Lower circuit पर बेचने वाले हज़ारों, और ख़रीदार कोई नहीं। Sell quantity में लाखों shares pending, buy side पर 0. सबसे ख़तरनाक हिस्सा ये है कि ये लगातार कई दिन चल सकता है — 5% band वाला share चार दिन lower circuit में रहे तो लगभग 19% नीचे चला जाता है, और उन चारों दिन आप कुछ नहीं कर सकते।
यहीं पर एक और चीज़ टूटती है जिस पर लोग भरोसा करते हैं — stop loss। Stop loss trigger तो हो जाएगा, order exchange को चला भी जाएगा, पर match किससे होगा? Buy side ख़ाली है। यानी circuit वाले stock में stop loss आपको बचा नहीं सकता, वो सिर्फ़ आपका order queue में डाल देता है। Stop loss कैसे काम करता है वाले guide में हमने SL और SL-M का फ़र्क़ detail में लिखा है, पर circuit वाली स्थिति में दोनों की एक ही हालत होती है।
F&O वाले stocks में circuit limit होती ही नहीं
अब वो हिस्सा जो मुझे किसी भी Hindi page पर ठीक से लिखा नहीं मिला, और जो active traders के लिए सबसे ज़रूरी है। जिन stocks में futures और options available हैं, उन पर 2/5/10/20 वाली fixed circuit limit लागू नहीं होती। उनकी जगह dynamic price band चलता है — जो दिन के अंदर ही, कई बार, चौड़ा होता जाता है।
दिन की शुरुआत ±10% से होती है। जब price band के 9.90% तक पहुँच जाए और वहाँ असली trading activity दिखे — NSE की शर्त है 50 trades, 10 अलग trading accounts और 3 अलग trading members से — तब exchange एक cooling-off period लगाता है, और उसके बाद band चौड़ा कर देता है। हर बार बराबर नहीं, बल्कि घटते क्रम में:
| कौनसी बार | Band कितना चौड़ा होगा | Cooling-off |
|---|---|---|
| पहली और दूसरी बार | ±5% | 15 मिनट (आख़िरी 30 मिनट में हो तो 5 मिनट) |
| तीसरी और चौथी बार | ±3% | 30 मिनट |
| पाँचवीं बार और उसके बाद | ±2% | 60 मिनट |
Sliding band rule: band एक तरफ़ चौड़ा होता है तो दूसरी तरफ़ भी उतना ही खिसकता है, और पुरानी band के बाहर पड़े orders cancel कर दिए जाते हैं। ये सारे बदलाव NSE ने June से October 2024 के बीच चरणों में लागू किए थे।
इसका practical मतलब क्या है? कि किसी बड़े F&O stock में result वाले दिन आप 10% पर "सुरक्षित" नहीं हो। Band खुलती जाएगी, और आपका exposure उसके साथ बढ़ता जाएगा। दूसरी तरफ़, जिन लोगों को cash segment के 5% circuit ने फँसा रखा है, उनके लिए ये भी सोचने लायक़ है कि क्या उस company में F&O available है — क्योंकि वहाँ दरवाज़ा बंद नहीं होता। इसी तरह के leverage-वाले फ़ैसलों में लोग कहाँ मार खाते हैं, वो option trading में loss क्यों होता है वाले article में SEBI के अपने data के साथ लिखा है।
पूरे बाज़ार का circuit — market-wide circuit breaker
अभी तक बात एक share की थी। पर जब Nifty 50 या Sensex ही तेज़ी से गिरे, तब पूरा बाज़ार रोक दिया जाता है। इसे index-based market-wide circuit breaker कहते हैं। दोनों index में से जो भी पहले level छुए, trigger वही मानते हैं, और नाप पिछले दिन के closing से होती है।
| Index कितना गिरा/चढ़ा | कब हुआ | Trading कितनी देर रुकेगी |
|---|---|---|
| 10% | दोपहर 1:00 बजे से पहले | 45 मिनट |
| 10% | 1:00 से 2:30 बजे के बीच | 15 मिनट |
| 10% | 2:30 बजे के बाद | कोई halt नहीं |
| 15% | 1:00 बजे से पहले | 1 घंटा 45 मिनट |
| 15% | 1:00 से 2:00 बजे के बीच | 45 मिनट |
| 15% | 2:00 बजे के बाद | बाक़ी पूरा दिन |
| 20% | किसी भी समय | बाक़ी पूरा दिन |
हर halt ख़त्म होने के बाद बाज़ार सीधे normal trading में नहीं लौटता — पहले 15 मिनट का pre-open call auction चलता है, जिसमें नई equilibrium price बनती है।
भारत में ये आख़िरी बार 13 March 2020 को लगा था। Nifty सुबह 9:20 बजे 10.07% गिरकर 8,625 पर आ गया और trading 45 मिनट के लिए रुक गई; 10:20 बजे 15 मिनट के pre-open के बाद बाज़ार वापस खुला। उससे पहले ऐसा 12 साल में नहीं हुआ था। बाज़ार कब खुलता-बंद होता है और ऐसे special sessions कैसे चलते हैं, इसकी पूरी timeline share market timing 2026 वाले guide में है।
IPO के पहले दिन circuit limit अलग होती है
Listing वाले दिन के नियम रोज़ के नियमों से अलग हैं, और यही वजह है कि कुछ IPO listing पर ही upper circuit में फँस जाते हैं। पहले दिन सुबह 9:00 से 10:00 बजे तक एक घंटे का special pre-open call auction चलता है — 45 मिनट order डालने के, 10 मिनट matching और equilibrium price तय करने के, और 5 मिनट buffer के। उसके बाद normal trading शुरू होती है, और उस दिन की band issue size पर निर्भर करती है:
| IPO issue size | पहले दिन की price band |
|---|---|
| ₹250 crore तक | equilibrium price से ±5% |
| ₹250 crore से ऊपर | equilibrium price से ±20% |
NSE और BSE पर equilibrium price अलग निकले तो दोनों मिलकर एक common equilibrium price (CEP) लेते हैं, और band उसी CEP के आस-पास लगती है। Framework SEBI के 11 April 2023 वाले circular से आता है।
छोटे IPO पर 5% की band ही वो वजह है जिससे एक तगड़ा listing gain वाला SME या छोटा issue पहले दिन बार-बार upper circuit दिखाता है और उसमें कोई घुस नहीं पाता। Allotment से listing तक का पूरा process IPO क्या है और apply कैसे करें में step by step है।
1 September 2026 से ETF के circuit के नियम बदल रहे हैं
ये सबसे ताज़ा बदलाव है और अभी किसी Hindi explainer में नहीं मिलेगा। SEBI ने जून 2026 में ETF trading का पूरा framework बदल दिया, और नया system 1 September 2026 से लागू हो रहा है।
पुरानी दिक़्क़त क्या थी: ETF की band का base उसकी दो दिन पुरानी (T-2) NAV से बनता था और equity/debt/commodity ETF पर एक fix 20% band लगती थी। दो दिन पुराना reference होने की वजह से ETF का market price कई बार उसकी असली underlying value से भटक जाता था — gold ETF वालों ने ये कई बार भुगता है।
| 1 September 2026 से पहले | 1 September 2026 से | |
|---|---|---|
| Base price | T-2 दिन की NAV | पिछले दिन के आख़िरी 30 मिनट का VWAP |
| Equity/Debt ETF band | Fix 20% | शुरू ±10%, ज़रूरत पड़ने पर चौड़ी |
| Band चौड़ी कब होगी | कभी नहीं, fix थी | 9.90% छूने पर 15 मिनट cooling-off, फिर +5% |
| Liquid/Overnight ETF | Fix 5% | Fix 5% (इनमें कोई बदलाव नहीं) |
अगर पिछले दिन आख़िरी 30 मिनट में कोई trade ही न हुआ हो तो last traded price, और पूरे दिन trade न हुआ हो तो latest official NAV base बनेगी। SEBI का अगला क़दम 1 April 2027 तक VWAP की जगह T-1 closing NAV को base बनाना है।
अगर आप index fund या ETF के रास्ते निवेश करते हैं तो ये बदलाव सीधे आपके buy price को छूता है — ख़ासकर volatile दिनों पर। ETF और index fund के बीच का बुनियादी फ़र्क़ index fund क्या है वाले guide में समझाया है।
एक ही share, दो exchange, अलग circuit — SEBI का जून 2026 वाला proposal
एक अजीब बात जो कम लोगों को पता है: एक ही share NSE और BSE दोनों पर listed हो सकता है, और अगर किसी दिन एक exchange पर उसमें trade नहीं हुआ तो अगले दिन उसकी circuit limit वहाँ अलग base से बनेगी। Illiquid shares में इसकी वजह से दोनों exchange पर price में काफ़ी फ़र्क़ आ जाता है।
SEBI ने 11 June 2026 को इस पर एक consultation paper निकाला है, जिसमें प्रस्ताव है कि multi-listed shares के लिए pre-open call auction का base price और daily price band दोनों exchanges पर एक जैसे तय हों। Public comments 2 July 2026 तक माँगे गए थे। ध्यान रखिए — ये अभी सिर्फ़ proposal है, नियम नहीं। जब तक final circular नहीं आता, आज का system वही है जो ऊपर लिखा है। मैं इसे यहाँ इसलिए लिख रहा हूँ ताकि जब ये लागू हो तो आपको यह अचानक न लगे।
Circuit में फँसे share के साथ practical में क्या करें
Theory ठीक है, पर सुबह 9:20 बजे screen पर lower circuit दिखे तो क्या करना है — वो list ये रही, उसी क्रम में जिस क्रम में मैं ख़ुद करता हूँ:
Pakka Points
- सबसे पहले order book देखिए, price नहीं — sell quantity कितनी pending है, उससे पता चलता है कि आपके आगे कितने लोग खड़े हैं
- AMO (After Market Order) रात में लगाइए ताकि सुबह queue में आपकी जगह ऊपर हो, 9:15 बजे order डालने वालों से पहले
- अगले दिन का pre-open session (9:00 से 9:08) इस्तेमाल कीजिए — वहाँ equilibrium price बनती है और कई बार circuit से बाहर का भाव मिल जाता है
- जिस stock में F&O available है, उसमें cash circuit की दीवार नहीं होती — hedge का रास्ता खुला रहता है
- जो कभी मत कीजिए: लगातार upper circuit देखकर उस stock को chase करना, और lower circuit में average करने के लिए और पैसा डालना
एक आख़िरी बात, जो मुझे उन चार दिनों में समझ आई। मैंने वो smallcap इसलिए ख़रीदा था क्योंकि वो लगातार upper circuit मार रहा था और मुझे लगा कि कुछ बड़ा चल रहा है। Circuit demand का पैमाना है, quality का नहीं। जिस चीज़ ने मुझे ऊपर खींचकर अंदर घुसाया, उसी ने नीचे जाकर दरवाज़ा बंद कर दिया — वो एक ही mechanism था, बस दिशा उलटी थी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Upper circuit lagne par share bech sakte hai kya?
हाँ, बेच सकते हो — बेचना ही एकमात्र काम है जो upper circuit पर आसानी से होता है। Upper circuit पर order book में खरीदने वालों की लंबी line लगी होती है और बेचने वाला कोई नहीं होता, इसलिए आप जैसे ही sell order डालोगे, वो तुरंत किसी pending buy order से match हो जाएगा। फँसते वो लोग हैं जो उस दिन खरीदना चाहते हैं, बेचने वाले नहीं।
Lower circuit me share kaise beche?
सीधा जवाब: उस दिन शायद नहीं बिकेगा, और ये मान लेना ही पहला कदम है। Lower circuit पर सिर्फ़ खरीदार गायब होते हैं, बेचने वालों की कतार होती है — आपका order उस कतार में पीछे लग जाता है। तीन practical रास्ते हैं: (1) अगले दिन के pre-open session (9:00 से 9:08 बजे) में order डालो, वहाँ equilibrium price अलग बन सकती है; (2) AMO (After Market Order) रात में ही लगा दो ताकि सुबह queue में सबसे आगे रहो; (3) अगर stock में F&O available है तो उसमें circuit limit होती ही नहीं — वहाँ hedge करके exposure कम किया जा सकता है। बाक़ी सब्र, क्योंकि लगातार lower circuit वाले stock में panic sell का कोई button नहीं होता।
Circuit limit kaun decide karta hai — SEBI ya exchange?
Framework SEBI बनाता है, पर किस share पर कौनसी limit लगेगी ये NSE और BSE अपने surveillance data से तय करते हैं और circular के ज़रिए बताते हैं। Review आम तौर पर महीने में होता है — बहुत ज़्यादा उछल-कूद करने वाले share की limit 20% से घटाकर 10%, 5% या 2% कर दी जाती है, और शांत रहने पर वापस बढ़ा दी जाती है। यानी limit stock की अपनी हरकत का नतीजा है, कोई random नंबर नहीं।
Kuch share me sirf 2% ya 5% circuit kyu hoti hai?
क्योंकि वो share exchange की surveillance list में हैं — ASM (Additional Surveillance Measure), GSM (Graded Surveillance Measure) या ESM (Enhanced Surveillance Measure)। ASM/GSM का Stage I आते ही daily band 5% या उससे कम हो जाता है, और ESM Stage II में सिर्फ़ 2% रह जाता है, साथ में 100% margin और कभी-कभी periodic call auction भी। खरीदने से पहले NSE की surveillance list देख लेना सबसे सस्ता homework है — 2% band वाला share exchange का लिखित warning होता है।
Upper circuit lagne ka matlab share achha hai kya?
नहीं, और यही सबसे महँगी ग़लतफ़हमी है। Upper circuit सिर्फ़ इतना बताता है कि उस दिन demand बहुत ज़्यादा थी — कारण अच्छा result भी हो सकता है और WhatsApp group में चल रही pump-and-dump भी। छोटे, कम liquid, 5% band वाले share लगातार कई दिन upper circuit दिखाकर लोगों को खींचते हैं, और फिर operator के निकलते ही वही share उतने ही दिन lower circuit में जाता है। Circuit कोई quality certificate नहीं है, सिर्फ़ demand-supply का असंतुलन है।
Nifty ya Sensex par circuit lagne par kya hota hai?
उसे market-wide circuit breaker कहते हैं और तब पूरा बाज़ार रुकता है, सिर्फ़ एक share नहीं। Nifty 50 या Sensex में से जो भी पहले 10%, 15% या 20% हिले, वही trigger मानते हैं, और index पिछले दिन के closing के मुक़ाबले नापा जाता है। Halt कितनी देर का होगा ये समय पर निर्भर करता है (पूरी table ऊपर article में है), और हर halt के बाद 15 मिनट का pre-open call auction चलता है, उसके बाद ही normal trading लौटती है। भारत में ये आख़िरी बार March 2020 में लगा था।
Pakke Sources — हमने कहाँ से verify किया
- NSE India — Equity market circuit breakers — Market-wide circuit breaker ke 10/15/20% levels, halt duration aur 15-minute pre-open re-open rule
- NSE India — Additional Surveillance Measure (ASM) FAQs — ASM/GSM/ESM stages me 5% aur 2% price band, 100% margin aur periodic call auction
- SEBI — Formulation of price bands for the first day of trading pursuant to IPO, re-listing etc. — Circular SEBI/HO/MRD/MRD-TPD-1/CIR/P/2023/55, 11 April 2023 — listing day price band framework
- SEBI — Circulars & consultation papers — ETF base price aur dynamic price band framework (1 September 2026 se lagu); multi-listed scrips ke uniform price band par 11 June 2026 ka consultation paper