Capital Gains Tax क्या है (Capital Gains Tax Kya Hai)? LTCG और STCG का पूरा हिसाब

जब आप कोई संपत्ति बेचते हैं — शेयर, mutual fund की units, सोना, ज़मीन, मकान — और बेचने का दाम ख़रीदने के दाम से ज़्यादा होता है, तो जो अंतर बचता है उसे capital gain कहते हैं। उसी पर लगने वाला कर capital gains tax है। तनख़्वाह की तरह यह हर महीने नहीं कटता; यह उसी साल गिना जाता है जिस साल बिक्री हुई।
पूरी उलझन सिर्फ़ दो सवालों में सिमट जाती है: कितने समय रखा, और कौन-सी संपत्ति थी। इन्हीं दो जवाबों से दर तय होती है। घबराइए मत — नीचे हर asset के लिए table बनी है, और property वाला वो विकल्प भी समझाया है जिसमें 20% भरना 12.5% भरने से सस्ता पड़ जाता है।
Pakka Points
- Listed share और equity mutual fund — 12 महीने की सीमा। बाक़ी लगभग सब कुछ (property, सोना, unlisted shares) — 24 महीने।
- Equity पर STCG 20%, LTCG 12.5% — साल में ₹1.25 लाख LTCG तक कर-मुक्त। Budget 2026 ने ये दरें नहीं बदलीं।
- 23 जुलाई 2024 से indexation हटा और सब पर एक समान 12.5% आया — पर उससे पहले ख़रीदी गई ज़मीन/मकान पर resident individual व HUF को 12.5% बिना indexation या 20% indexation के साथ, जो कम हो, वो चुनने का हक़ है।
- 1 अप्रैल 2023 के बाद ख़रीदे गए debt mutual funds पर LTCG की कोई अलग दर नहीं — पूरा मुनाफ़ा आपके slab पर।
- Short-term loss दोनों तरह के gain से घटता है, long-term loss सिर्फ़ long-term gain से; carry-forward 8 साल — पर तभी, जब ITR नियत तारीख़ तक भरा हो।
- Income Tax Act, 2025 में धारा 111A अब 196, 112A अब 198, 54 अब 82, 54EC अब 85, 54F अब 86 — पर ये नंबर जुलाई 2027 वाली filing से लागू होंगे, इस साल नहीं।
पहले होल्डिंग पीरियड — यहीं से दर तय होती है
23 जुलाई 2024 से पहले होल्डिंग पीरियड की तीन-चार श्रेणियाँ थीं (12, 24, 36 महीने)। अब सिर्फ़ दो हैं, और यही सबसे बड़ी सरलता है जो हाल के बरसों में आई:
| संपत्ति | Long-term मानी जाएगी | STCG दर | LTCG दर |
|---|---|---|---|
| Listed shares (STT चुकाया हुआ) | 12 महीने से ज़्यादा | 20% | 12.5% (₹1.25 लाख तक छूट) |
| Equity mutual fund / equity ETF | 12 महीने से ज़्यादा | 20% | 12.5% (₹1.25 लाख तक छूट) |
| Listed bonds / debentures | 12 महीने से ज़्यादा | slab | 12.5% |
| Unlisted shares | 24 महीने से ज़्यादा | slab | 12.5% |
| ज़मीन / मकान | 24 महीने से ज़्यादा | slab | 12.5% (पुरानी संपत्ति पर विकल्प — नीचे देखिए) |
| सोना, चाँदी, gold ETF | 24 महीने से ज़्यादा | slab | 12.5% |
| Debt mutual fund (1 अप्रैल 2023 के बाद ख़रीदा) | लागू नहीं | slab | slab — कोई अलग LTCG दर नहीं |
₹1.25 लाख की छूट सिर्फ़ equity वाले LTCG पर है और हर वित्तीय वर्ष में नए सिरे से मिलती है। STCG की दर पर कोई ऐसी छूट नहीं।
Property का वो विकल्प, जिसमें 20% भरना सस्ता पड़ता है
Finance (No. 2) Act, 2024 ने 23 जुलाई 2024 से indexation का लाभ हटा दिया और सब पर एक समान 12.5% कर दिया। पर ज़मीन और मकान के लिए एक grandfathering व्यवस्था रखी गई — उस तारीख़ से पहले ख़रीदी गई संपत्ति पर resident individual और HUF दो में से जो कम बने, वो भर सकते हैं: 12.5% बिना indexation, या 20% indexation के साथ।
यह विकल्प किस स्थिति में किधर झुकता है, वो एक उदाहरण से साफ़ हो जाएगा। मान लीजिए मकान 2012-13 में ₹40 लाख में ख़रीदा और 2025-26 में ₹1.10 करोड़ में बिका:
| विकल्प A — 12.5%, बिना indexation | विकल्प B — 20%, indexation के साथ | |
|---|---|---|
| बिक्री मूल्य | ₹1,10,00,000 | ₹1,10,00,000 |
| लागत | ₹40,00,000 | ₹40,00,000 × CII समायोजन ≈ ₹87,60,000 |
| Capital gain | ₹70,00,000 | ₹22,40,000 |
| कर | ₹8,75,000 | ₹4,48,000 |
| नतीजा | — | इस मामले में विकल्प B सस्ता |
Indexation की रक़म ख़रीद वर्ष और बिक्री वर्ष के Cost Inflation Index पर निर्भर करती है, इसलिए ऊपर का आँकड़ा उदाहरण है। नियम सीधा है: जहाँ महँगाई का असर मुनाफ़े से बड़ा है (पुरानी संपत्ति, मामूली बढ़ोतरी) वहाँ 20% वाला विकल्प जीतता है; जहाँ दाम कई गुना बढ़े हैं, वहाँ 12.5% वाला।
Pehle likh lijiye: यह विकल्प सिर्फ़ ज़मीन-मकान पर है, सिर्फ़ resident individual और HUF के लिए है, और सिर्फ़ 23 जुलाई 2024 से पहले हासिल की गई संपत्ति पर है। उसके बाद ख़रीदी गई property पर सीधा 12.5% बिना indexation ही लगेगा, विकल्प नहीं मिलेगा। सोने और debt funds के लिए तो indexation पूरी तरह जा चुका है।
Tax बचाने के तीन जायज़ रास्ते
- दूसरा घर (पुरानी धारा 54, नई धारा 82)। आवासीय मकान बेचकर आया मुनाफ़ा दूसरे आवासीय मकान में लगाइए — बिक्री से 1 साल पहले या 2 साल बाद ख़रीद, या 3 साल में निर्माण। छूट की अधिकतम सीमा ₹10 करोड़।
- Bonds (पुरानी धारा 54EC, नई धारा 85)। बिक्री के 6 महीने के भीतर NHAI/REC/PFC जैसे specified bonds में निवेश। एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम ₹50 लाख, lock-in 5 साल। यह रास्ता ज़मीन और मकान दोनों पर चलता है।
- Capital Gains Account Scheme। अगर ITR भरने की तारीख़ तक पैसा नए मकान में लग नहीं पाया, तो उसे किसी अधिसूचित बैंक के CGAS खाते में जमा कर दीजिए — तभी छूट बचेगी। यह क़दम भूल जाने पर लोगों की छूट सबसे ज़्यादा जाती है।
Papa की एक फ़ाइल में यही हुआ था — पैतृक ज़मीन जुलाई में बिकी, नया मकान अगले फ़रवरी में लिया, और बीच के महीनों में पैसा साधारण बचत खाते में पड़ा रहा। छूट तब भी मिल गई क्योंकि timeline के भीतर थी, पर assessment के वक़्त वो CGAS वाला सवाल आया ज़रूर। बीच में पैसा कहाँ रखा — यह भी record का हिस्सा है।
नुक़सान का हिसाब — set-off और carry-forward
| नुक़सान का प्रकार | उसी साल किससे घटा सकते हैं | आगे ले जाना |
|---|---|---|
| Short-term capital loss | Short-term और long-term, दोनों तरह के gain से | 8 वित्तीय वर्ष |
| Long-term capital loss | सिर्फ़ long-term gain से | 8 वित्तीय वर्ष |
| Speculative (intraday) loss | सिर्फ़ speculative मुनाफ़े से | 4 वित्तीय वर्ष |
शर्त एक ही, और वही सबसे ज़्यादा छूटती है — नुक़सान आगे ले जाना है तो उस साल का ITR नियत तारीख़ तक भरा होना चाहिए। देर से भरे return में carry-forward का दावा नहीं बनता।
इसीलिए जिस साल घाटा हुआ हो, उस साल ITR भरना और भी ज़रूरी हो जाता है — भले ही आय कर-योग्य सीमा से कम हो। पूरी प्रक्रिया ITR कैसे भरें वाले guide में क़दम-दर-क़दम लिखी है।
Advance tax — capital gain पर कब और कितना
अगर साल भर की कुल कर देनदारी ₹10,000 से ऊपर बनती है तो advance tax लागू होता है। Capital gain का पहले से अंदाज़ा नहीं होता, इसलिए क़ानून यहाँ रियायत देता है: जिस तिमाही में मुनाफ़ा हुआ, उसके बाद बची हुई किस्तों में उसका कर जोड़ देना काफ़ी है। मकान अक्टूबर में बिका तो 15 दिसंबर और 15 मार्च की किस्तों में हिसाब लगाइए — 15 जून और 15 सितंबर वाली किस्तों के लिए ब्याज नहीं लगेगा।
Salary पर पहले ही TDS कट रहा है तो उसे भी गिनती में लीजिए। पूरा हिसाब Income Tax Calculator से लगाइए, और यह भी देख लीजिए कि आपके लिए कौन सा regime सही बैठता है — capital gains की दरें दोनों regimes में एक जैसी हैं, पर बाक़ी आय पर फ़र्क़ पड़ता है।
बदले हुए section number — और वो तारीख़ जो सब भूल रहे हैं
Income Tax Act, 2025 पहली अप्रैल 2026 से लागू है और उसने 1961 वाले क़ानून की 819 धाराओं को 536 में समेट दिया है। Capital gains वाली धाराओं के नए नंबर ये हैं:
| किस बारे में | पुरानी धारा | नई धारा |
|---|---|---|
| Equity पर STCG | 111A | 196 |
| Equity पर LTCG (₹1.25 लाख छूट) | 112A | 198 |
| आवासीय मकान में पुनर्निवेश | 54 | 82 |
| कृषि भूमि | 54B | 83 |
| अनिवार्य अधिग्रहण | 54D | 84 |
| Specified bonds (₹50 लाख) | 54EC | 85 |
| ग़ैर-आवासीय संपत्ति बेचकर मकान | 54F | 86 |
नंबर बदले हैं, शर्तें नहीं — limits, समय-सीमाएँ और दरें वही हैं।
अब वो पंक्ति जो लगभग हर जगह छूट रही है: 2026 में आप जो ITR भर रहे हैं वो वित्त वर्ष 2025-26 का है, और उसमें पुराने ही नंबर चलेंगे। नए नंबर tax year 2026-27 के return से लागू होंगे — यानी जुलाई 2027 वाली filing से। इस साल का form देखकर परेशान मत होइए, और अगर कोई सलाहकार अभी से "धारा 198 के तहत" लिखकर भेज रहा है, तो एक बार तारीख़ पूछ लीजिए।
इसी तरह 80C अब धारा 123 है और 80D धारा 126 — विस्तार से 80C वाले guide और 2026-27 के slab वाले guide में लिखा है।
बेचने से पहले — छह लाइनों की checklist
- ख़रीद की तारीख़ निकालिए। 12 या 24 महीने की सीमा पार हुई या नहीं?
- Equity है तो देखिए इस साल ₹1.25 लाख की छूट कितनी बची है।
- Property 23 जुलाई 2024 से पहले की है? तो दोनों विकल्पों का हिसाब लगवाइए।
- पिछले सालों का carry-forward नुक़सान पड़ा है क्या? पहले वो घटाइए।
- पुनर्निवेश करना है तो 6 महीने / 2 साल / 3 साल वाली तारीख़ अभी कैलेंडर में लिख लीजिए।
- बिक्री की तिमाही देखकर advance tax की अगली किस्त का हिसाब जोड़ लीजिए।
और सबसे आख़िरी बात — ख़रीद के काग़ज़ सँभालकर रखिए, चाहे बीस साल पुराने हों। Capital gain का पूरा हिसाब उसी एक आँकड़े से शुरू होता है, और वही सबसे ज़्यादा खोता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
LTCG aur STCG me kya fark hai?
फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि आपने संपत्ति कितने समय रखी। तय अवधि से ज़्यादा रखने पर मुनाफ़ा long-term capital gain (LTCG) कहलाता है, कम रखने पर short-term (STCG)। Listed shares और equity mutual funds के लिए वो सीमा 12 महीने है; बाक़ी लगभग हर चीज़ के लिए — property, सोना, unlisted shares — 24 महीने। LTCG पर दर आम तौर पर कम होती है, इसीलिए बेचने से पहले तारीख़ गिनना फ़ायदे का काम है।
Share bechne par kitna tax lagta hai 2026 me?
Listed share या equity mutual fund 12 महीने के अंदर बेचा तो STCG 20%। 12 महीने बाद बेचा तो LTCG 12.5%, और साल भर में ₹1.25 लाख तक का LTCG कर-मुक्त है। यह छूट हर वित्तीय वर्ष में नए सिरे से मिलती है, इसलिए बहुत से लोग हर साल उतना मुनाफ़ा जान-बूझकर book कर लेते हैं। Budget 2026 ने इन दरों में कोई बदलाव नहीं किया।
Property bechne par capital gains tax kaise bachaye?
तीन जायज़ रास्ते हैं। पहला — दूसरा आवासीय मकान ख़रीदना या बनवाना (पुरानी धारा 54; बेचने से 1 साल पहले या 2 साल बाद ख़रीद, या 3 साल में निर्माण)। दूसरा — बिक्री के 6 महीने के भीतर NHAI/REC जैसे specified bonds में निवेश, एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम ₹50 लाख, 5 साल का lock-in (पुरानी धारा 54EC)। तीसरा — ITR की तारीख़ तक पैसा इस्तेमाल न हो पाए तो उसे Capital Gains Account Scheme के खाते में डाल दीजिए, वरना छूट चली जाती है। धारा 54 और 54F में छूट की अधिकतम सीमा ₹10 करोड़ है।
Nuksan (capital loss) ko adjust kar sakte hain kya?
हाँ, पर नियम से। Short-term capital loss को short-term और long-term दोनों तरह के मुनाफ़े से घटाया जा सकता है; long-term loss सिर्फ़ long-term gain से। जो हिस्सा उसी साल adjust न हो, वो अगले 8 वित्तीय वर्षों तक आगे ले जाया जा सकता है। पर एक शर्त है जिस पर सबसे ज़्यादा लोग फिसलते हैं — नुक़सान आगे ले जाने के लिए उस साल का ITR नियत तारीख़ तक भरा होना चाहिए। देर से भरे ITR में carry-forward नहीं मिलता।
Capital gains par advance tax bharna padta hai kya?
हाँ, अगर कुल tax देनदारी ₹10,000 से ऊपर बनती है। पर क़ानून यहाँ व्यावहारिक है — capital gain पहले से पता नहीं होता, इसलिए जिस तिमाही में मुनाफ़ा हुआ, उसके बाद बची हुई किस्तों में उसका advance tax भरना काफ़ी माना जाता है। मान लीजिए मकान अक्टूबर में बिका — तो 15 दिसंबर और 15 मार्च वाली किस्तों में हिसाब जोड़ लीजिए, जून-सितंबर वाली किस्तों पर ब्याज नहीं लगेगा।
Income Tax Act 2025 me capital gains ke section number badal gaye hain?
हाँ। शेयरों पर STCG वाली पुरानी धारा 111A अब धारा 196 है, LTCG वाली 112A अब 198, मकान की छूट वाली 54 अब 82, bonds वाली 54EC अब 85, और 54F अब 86 है। पर तारीख़ ध्यान से देखिए — 2026 में जो ITR आप वित्त वर्ष 2025-26 का भर रहे हैं, उसमें पुराने ही नंबर चलेंगे। नए नंबर tax year 2026-27 के return से, यानी जुलाई 2027 वाली filing से लागू होंगे।
Pakke Sources — हमने कहाँ से verify किया
- Income Tax Department — Capital Gains — Holding periods, LTCG 12.5% / STCG 20%, ₹1.25 lakh equity chhoot
- Finance (No. 2) Act, 2024 — 23 July 2024 se indexation hataya; property par 12.5% bina indexation vs 20% indexation ka vikalp
- Income Tax Act, 2025 — 1 April 2026 se lagu; 111A→196, 112A→198, 54→82, 54EC→85, 54F→86
- Income Tax Department — Advance Tax — Capital gain par baaki bachi kiston me advance tax bharna paryapt
- Cost Inflation Index — CBDT notifications — Indexation vale vikalp ka hisaab lagane ke liye