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NAV क्या है (NAV Kya Hai)? Mutual Fund की NAV का पूरा गणित

Pakka-Checked· 21 Aug 2026 · Vikram Mehta
Rohan Deshmukh · Nivesh Desk · Updated: 21 Aug 2026
NAV kya hai — साफ़ सफ़ेद दीवार वाले कमरे में युवक laptop के सामने बैठकर mutual fund की NAV और units का हिसाब देखता हुआ

सच बोलूँ? मैंने अपने पहले mutual fund में इसी एक ग़लतफ़हमी की वजह से पैसा लगाया था। App पर दो funds दिख रहे थे — एक की NAV ₹14, दूसरे की ₹487। मुझे लगा पहला सस्ता है। तीन साल बाद समझ आया कि वो सवाल ही बेमानी था।

NAV का मतलब है Net Asset Value। Fund के पास जितनी संपत्ति है, उसमें से देनदारियाँ घटाओ, और बची रक़म को कुल units से भाग दे दो — जो आया वो एक unit की NAV है। बस इतना ही।

पर इसके आसपास तीन चीज़ें ऐसी हैं जिन पर पैसा टिकता है: NAV सस्ती-महँगी नहीं होती, कौन-सी दिन की NAV मिलेगी यह आपके click पर नहीं, पैसे के पहुँचने पर तय होता है, और NAV आपको ख़र्च काटने के बाद वाली संख्या दिखाती है। एक-एक करके।

Pakka Points

  • NAV = (कुल संपत्ति − देनदारियाँ) ÷ कुल units — हर कारोबारी दिन के अंत में एक बार निकलती है।
  • कम NAV वाला fund सस्ता नहीं होता — units ज़्यादा मिलती हैं, पैसा उतना ही रहता है।
  • Cut-off: ज़्यादातर schemes में दोपहर 3 बजे; liquid/overnight में ख़रीद 1:30 बजे, redemption 3 बजे।
  • Order लगाना काफ़ी नहीं — पैसा भी उसी cut-off तक fund के खाते में realise होना चाहिए (2021 से लागू नियम)।
  • Expense ratio NAV में से पहले ही कट चुका होता है — इसीलिए 1% का फ़र्क़ भी सालों में बड़ा हो जाता है।
  • 1 अप्रैल 2026 से SEBI ने TER को तीन हिस्सों में बाँटा — Base Expense Ratio, brokerage/commission, और statutory levies।

NAV निकलती कैसे है

मान लो एक fund के पास shares और bonds मिलाकर ₹520 करोड़ की संपत्ति है, और ₹4 करोड़ की देनदारियाँ (fees, बक़ाया ख़र्च वगैरह)। कुल units 12 करोड़ हैं।

NAV = (520 − 4) ÷ 12 = ₹43 प्रति unit।

अगले दिन portfolio के shares 1% ऊपर गए, तो संपत्ति ₹525.2 करोड़ हो गई और NAV लगभग ₹43.43 हो जाएगी। ग़ौर करो — इसमें कहीं यह नहीं आया कि कितने लोगों ने वो fund ख़रीदा। Share की तरह demand-supply से NAV नहीं हिलती। नए लोग पैसा डालते हैं तो units भी बढ़ती हैं और संपत्ति भी — भाग वही रहता है।

₹10 वाला मिथक — पूरा गणित एक table में

हर NFO की marketing यही करती है: "सिर्फ़ ₹10 की NAV पर मौक़ा"। एक minute — वो ₹10 सिर्फ़ एक accounting convention है, कोई छूट नहीं। दो funds का एक ही हिसाब देखो:

Fund A — NAV ₹10Fund B — NAV ₹600
आपने लगाया₹12,000₹12,000
Units मिलीं1,20020
साल भर में portfolio का return12%12%
नई NAV₹11.20₹672
आपके पैसे की क़ीमत₹13,440₹13,440

Units की संख्या अलग, नतीजा वही। Fund की performance उसके portfolio से आती है, उसकी NAV की संख्या से नहीं। ऊँची NAV का मतलब सिर्फ़ इतना है कि fund पुराना है और उसने अब तक कमाया है।

असल में यह देखो कि fund की category क्या है, expense ratio कितना है, और उसने अपनी benchmark के मुक़ाबले कैसा किया। कैसे चुनना है, वो पूरा framework पहला fund कैसे चुनें में लिखा है।

कौन-सी दिन की NAV मिलेगी — असली नियम

यहाँ ज़्यादातर लोग एक जगह फँसते हैं। वो सोचते हैं cut-off से पहले order लगा दिया, तो उसी दिन की NAV पक्की। नहीं। 2021 से नियम यह है कि पैसा भी उसी cut-off तक fund के खाते में realise हो जाना चाहिए

Fund का प्रकारख़रीद का cut-offRedemption का cut-off
Equity, hybrid, debt (liquid/overnight छोड़कर)दोपहर 3:00 बजेदोपहर 3:00 बजे
Liquid और overnight fundsदोपहर 1:30 बजेदोपहर 3:00 बजे

शर्त दोनों तरफ़ लागू — order भी समय पर, और ख़रीद में पैसा भी समय पर fund के खाते में। NEFT/RTGS से भेजा पैसा उसी दिन न पहुँचे तो अगले कारोबारी दिन की NAV लगेगी।

इसका practical असर क्या है? मान लो बाज़ार 3% गिरा है और तुम 2:45 बजे ₹50,000 डालने का फ़ैसला करते हो। UPI से गया तो शायद उसी दिन realise हो जाए। NEFT से भेजा और बैंक ने शाम को process किया — तो अगले दिन की NAV मिलेगी, और अगर बाज़ार अगले दिन चढ़ गया तो वो "गिरावट पर ख़रीदने" वाला फ़ायदा हाथ से निकल गया।

SIP में यह झंझट नहीं होती, क्योंकि mandate अपने आप तय तारीख़ पर चलता है — यह भी एक वजह है कि lumpsum के मुक़ाबले SIP शुरुआती लोगों के लिए आसान पड़ती है।

SIP में हर महीने अलग units क्यों आती हैं

₹5,000 की SIP है, पर units हर महीने अलग — यह देखकर बहुत लोग घबरा जाते हैं। यही तो काम कर रहा है:

महीनाSIP राशिउस दिन की NAVमिली units
महीना 1₹5,000₹50.00100.00
महीना 2₹5,000₹45.45110.01
महीना 3₹5,000₹52.6395.00
महीना 4₹5,000₹41.67119.99
कुल₹20,000औसत लागत ≈ ₹47.17424.00

ग़ौर करो — जिन महीनों में NAV गिरी, उन महीनों में units ज़्यादा मिलीं। चार महीनों की सीधी औसत NAV ₹47.44 बनती है, पर आपकी असल औसत लागत ₹47.17 रही। यही rupee cost averaging है, और यही SIP का पूरा गणित है।

पूरी बात SIP क्या है में है, और अपना हिसाब SIP Calculator पर लगा लो।

Expense ratio — जो NAV में से पहले ही कट चुका है

यह हिस्सा लोग सबसे ज़्यादा छोड़ते हैं। जो NAV आप देखते हो, वो पहले ही fund के सारे ख़र्च घटाने के बाद वाली संख्या है। यानी expense ratio अलग से bill बनकर नहीं आता — वो चुपचाप NAV को हर दिन थोड़ा-थोड़ा दबाता है।

एक ही portfolio वाले दो plans लो — एक regular (expense ratio 1.6%), एक direct (0.6%)। बीस साल में उस 1% का फ़र्क़ लाखों में बैठता है। पूरा हिसाब direct vs regular plan वाले article में worked out है।

और 2026 के लिए एक चेतावनी। 1 अप्रैल 2026 से SEBI ने TER की परिभाषा बदल दी है — अब वो तीन अलग हिस्सों का जोड़ है: Base Expense Ratio, brokerage/commission, और GST, STT, stamp duty जैसे statutory levies। मतलब इस साल किसी fund का "expense ratio" पहले से कम दिख सकता है सिर्फ़ इसलिए कि अब उसमें कुछ चीज़ें अलग से गिनी जा रही हैं। असली तुलना करनी है तो देखो कि आँकड़ा BER का है या पूरे TER का — दोनों को आपस में मत मिलाओ।

IDCW मिलने पर NAV गिरती है — यह घाटा नहीं है

IDCW option (जिसे पहले dividend option कहते थे) में जब payout होता है, record date पर NAV ठीक उतनी ही गिर जाती है। ₹42 की NAV में से ₹2 का payout हुआ, तो NAV ₹40 रह जाएगी और ₹2 आपके खाते में आ जाएँगे।

कुल दौलत वही रही — बस जगह बदली। फ़र्क़ tax का पड़ता है, क्योंकि वो ₹2 आपके slab पर tax होते हैं। यही वजह है कि लंबी अवधि के निवेशक आमतौर पर growth option चुनते हैं। Share के dividend से यह कैसे अलग है, वो dividend वाले guide में समझाया है।

NAV कहाँ देखें, और कब भरोसा करें

  • AMFI की website पर हर scheme की रोज़ की NAV आती है — यही सबसे भरोसेमंद, तटस्थ स्रोत है।
  • AMC की अपनी website और आपके app पर भी वही आँकड़ा दिखता है, आम तौर पर शाम को अपडेट होकर।
  • App पर दिन में दिख रहा "अनुमानित" बदलाव असली NAV नहीं है — असली संख्या दिन बंद होने के बाद ही आती है।

तीन बातें, जो NAV देखते वक़्त याद रखनी हैं

  1. NAV की संख्या से fund की गुणवत्ता का कोई संबंध नहीं। ₹10 और ₹600 दोनों बराबर हैं।
  2. NAV किस दिन की मिलेगी, यह पैसे के पहुँचने से तय होता है — click के समय से नहीं।
  3. NAV पहले ही ख़र्च काट चुकी है, इसलिए expense ratio की तुलना हमेशा एक ही परिभाषा पर कीजिए।

बाक़ी बुनियाद के लिए mutual fund क्या है और index fund क्या है — दोनों पढ़ लो। NAV समझ में आ गई तो आधा mutual fund समझ में आ गया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

NAV ka full form kya hai?

Net Asset Value — यानी शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य। Fund के पास जितनी संपत्ति है उसमें से देनदारियाँ घटाकर, बची रक़म को कुल units से भाग दे दीजिए — जो आया वो एक unit की NAV है। यह हर कारोबारी दिन के अंत में एक बार निकाली जाती है, share की तरह पल-पल नहीं बदलती।

Kam NAV wala mutual fund sasta hota hai kya?

नहीं, और यही इस विषय की सबसे महँगी ग़लतफ़हमी है। ₹10 NAV वाले fund में ₹12,000 लगाओ तो 1,200 units मिलेंगी; ₹600 NAV वाले में वही ₹12,000 लगाओ तो 20 units। दोनों में 12% return आए तो दोनों की क़ीमत ₹13,440 ही होगी। Units की संख्या अलग है, पैसा वही है। Share की तरह यहाँ ‘सस्ता’ और ‘महँगा’ जैसी कोई चीज़ नहीं होती।

Mutual fund me paisa lagane ke baad kaunsi NAV milti hai?

उस दिन की, अगर दो शर्तें पूरी हों — order cut-off time से पहले लगा हो, और पैसा भी उसी cut-off तक fund के खाते में पहुँच चुका हो। ज़्यादातर schemes के लिए cut-off दोपहर 3 बजे है; liquid और overnight funds में ख़रीद के लिए 1:30 बजे और redemption के लिए 3 बजे। सिर्फ़ order लगा देना काफ़ी नहीं — पैसा realise होना ज़रूरी है, यही 2021 से लागू नियम है।

NAV roz kyu badalti hai?

क्योंकि fund के portfolio में जो shares और bonds हैं, उनके बाज़ार भाव रोज़ बदलते हैं। दिन ख़त्म होने पर उन सबके closing price से fund की कुल क़ीमत निकाली जाती है, ख़र्च घटाए जाते हैं, और units से भाग देकर नई NAV आती है। इसीलिए NAV में demand-supply का कोई रोल नहीं — कितने लोग उस fund को ख़रीद रहे हैं, इससे NAV ऊपर-नीचे नहीं होती।

Expense ratio ka NAV par kya asar padta hai?

जो return आप देखते हो वो पहले ही expense ratio काटकर आता है — NAV हर दिन ख़र्च घटाने के बाद निकाली जाती है। यानी 1.5% expense ratio वाले fund की NAV, वही portfolio रखने वाले 0.5% expense ratio वाले fund से हर साल लगभग 1% पीछे रहेगी। 1 अप्रैल 2026 से SEBI ने TER को तीन हिस्सों में बाँट दिया है — Base Expense Ratio, brokerage/commission, और GST-STT जैसे statutory charges। इसलिए 2026 में कहीं ‘expense ratio घट गया’ दिखे तो पहले देखिए कि वो असली कटौती है या सिर्फ़ नई परिभाषा।

IDCW/dividend milne par NAV gir jati hai kya?

हाँ, और यह घाटा नहीं है। जितना payout होता है, record date पर NAV उतनी ही गिर जाती है — पैसा fund से निकलकर आपके खाते में आता है, बस जगह बदलती है। इसीलिए growth option और IDCW option में कुल दौलत का फ़र्क़ payout से नहीं, tax से पड़ता है।

Pakke Sources — हमने कहाँ से verify किया

  1. AMFI — daily NAV of all schemesHar scheme ki roz ki NAV ka tatasth srot
  2. SEBI — uniform cut-off timings & realisation of fundsNAV wahi din ki jab paisa scheme ke khaate me realise ho jaye (2021 se lagu)
  3. SEBI (Mutual Funds) Regulations, 2026 — expense ratio framework1 April 2026 se TER = Base Expense Ratio + brokerage/commission + statutory levies
  4. Mutual Funds Sahi Hai (AMFI) — investor educationNAV, units aur expense ratio ki buniyadi jaankari
Zaroori baat: Ye jaankari sirf education ke liye hai — nivesh ki salah nahi. PaisaPakka koi tips nahi deta. Mutual fund aur share market nivesh bazaar-jokhim ke adheen hai. Nivesh se pehle khud research karein ya SEBI-registered advisor se milein.
Rohan Deshmukh avatar
Nivesh Desk

2019 me pehli SIP ₹500 ki — ghar me pehla insaan jo share market tak pahuncha. Tab se har fund, har app khud test karke likhta hai. Articles me jo screenshots dikhte hain, wo Rohan ke apne account ke hain.

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