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Education Loan कैसे लें (Education Loan Kaise Le)? Moratorium का ब्याज ही असली सवाल है

Pakka-Checked· 21 Aug 2026 · Vikram Mehta
Meera Iyer · Insurance & Loans Desk · Updated: 21 Aug 2026
Education loan kaise le — कॉलेज के खुले परिसर में माँ और बेटी बैंक के education loan के काग़ज़ पर साथ बैठकर हस्ताक्षर करती हुईं, तेज़ दिन की रोशनी

Education loan की तुलना करते वक़्त लगभग हर परिवार एक ही संख्या देखता है — ब्याज दर। 9.25% बनाम 10.75%, और फ़ैसला हो जाता है।

पर पढ़ाई के loan में सबसे बड़ा अंतर दर से नहीं आता। वो moratorium वाली धारा से आता है — यानी पढ़ाई के उन सालों में ब्याज कैसे जुड़ता है, जब आप एक रुपया नहीं दे रहे। एक ही दर पर, दो अलग शब्दों के कारण, दो परिवारों पर लाखों का फ़र्क़ पड़ सकता है। Agent यह नहीं बताएगा, मैं बता रही हूँ।

Pakka Points

  • Moratorium में EMI नहीं लगती, ब्याज लगता है — सरकारी बैंक अक्सर simple interest लेते हैं, कई NBFC मासिक चक्रवृद्धि।
  • पढ़ाई के दौरान सिर्फ़ ब्याज भरते रहिए — ब्याज मूलधन में नहीं जुड़ता, और आम तौर पर 0.5%-1% की दर-छूट भी मिलती है।
  • PM-Vidyalaxmi — ₹7.5 लाख तक बिना collateral, बिना guarantor; ₹8 लाख तक की पारिवारिक आय पर moratorium के दौरान 3% ब्याज सहायता।
  • 21 जुलाई 2026 तक इस योजना में 1,12,817 loans, कुल ₹15,634 करोड़ मंज़ूर हो चुके थे।
  • विदेश भेजी रक़म पर LRS में ₹10 लाख से ऊपर 2% TCS (1 अप्रैल 2026 से) — पर अधिसूचित संस्थान के education loan से भेजने पर TCS शून्य, चाहे रक़म कितनी भी हो।
  • ब्याज पर मिलने वाली आयकर छूट की कोई ऊपरी सीमा नहीं, 8 साल तक — पर सिर्फ़ old regime में।

Moratorium — जहाँ असली रक़म बनती है

Moratorium का मतलब है पढ़ाई की अवधि + 6 से 12 महीने, जिसमें आपको EMI नहीं देनी। सुनने में यह राहत है। पर ब्याज उन सालों में भी जुड़ता रहता है — और कैसे जुड़ता है, यहीं दो रास्ते अलग हो जाते हैं।

₹20 लाख का loan, 4 साल का course, 6 महीने का अतिरिक्त moratorium (कुल 54 महीने), दर 10.5% — तीन स्थितियों में हिसाब देखिए:

स्थितिMoratorium ख़त्म होने पर बक़ायाआगे 10 साल की EMI
Simple interest, कुछ नहीं भरा≈ ₹29,45,000≈ ₹39,750
मासिक चक्रवृद्धि, कुछ नहीं भरा≈ ₹31,80,000≈ ₹42,900
Simple interest, हर महीने सिर्फ़ ब्याज भरा₹20,00,000≈ ₹26,990

आँकड़े illustration हैं और दर व सटीक अवधि से बदलेंगे — पर क्रम हमेशा यही रहता है। तीसरी पंक्ति में परिवार ने 54 महीनों में लगभग ₹9.45 लाख ब्याज दिया, और बदले में EMI लगभग ₹12,760 प्रति माह कम हुई। यही एक फ़ैसला पूरे loan का सबसे बड़ा फ़ैसला है।

इसलिए sanction letter में ये तीन वाक्य ढूँढिए, ब्याज दर से पहले: moratorium के दौरान ब्याज simple है या compounded; वो ब्याज मूलधन में capitalise होगा या नहीं; और moratorium में ब्याज भरने पर दर में कोई रियायत है या नहीं।

PM-Vidyalaxmi — collateral का सवाल जहाँ हट जाता है

आम बैंकिंग व्यवहार यह रहा है: ₹4 लाख तक कोई security नहीं, ₹4 से ₹7.5 लाख के बीच तीसरे पक्ष की गारंटी, और उससे ऊपर मूर्त संपत्ति गिरवी। यही वो जगह है जहाँ ज़्यादातर परिवार अटक जाते हैं — मकान गिरवी रखने की हिम्मत नहीं होती।

PM-Vidyalaxmi इसी कड़ी को तोड़ती है। योजना के दायरे में आने वाले संस्थानों के छात्रों को ₹7.5 लाख तक का loan बिना collateral और बिना guarantor मिलता है, क्योंकि उस पर सरकार की credit guarantee होती है — जोखिम बैंक के बजाय गारंटी निधि उठाती है। और जिन परिवारों की सालाना आय ₹8 लाख तक है, उन्हें moratorium के दौरान 3% ब्याज सहायता मिलती है।

यह कागज़ी योजना नहीं है — 21 जुलाई 2026 तक इसमें 1,12,817 loans, कुल ₹15,634 करोड़ के मंज़ूर हो चुके थे। आवेदन एक ही पोर्टल से होता है, और वहीं से स्थिति भी दिखती रहती है, इसलिए बैंक-दर-बैंक फ़ॉर्म भरने की ज़रूरत नहीं।

एक शर्त साफ़ समझ लीजिए: यह योजना पात्र संस्थानों की सूची पर चलती है। दाख़िला लेने से पहले पोर्टल पर देख लीजिए कि आपका संस्थान उसमें है या नहीं — बाद में पता चलने पर पूरा गणित बदल जाता है।

विदेश की पढ़ाई — TCS का वो नियम जो loan के पक्ष में है

विदेश पैसा भेजते वक़्त Liberalised Remittance Scheme के तहत TCS लगता है। 2026 में दो बदलाव हुए हैं, और दोनों राहत के हैं:

पैसा कहाँ से जा रहा हैसीमाTCS
अपनी बचत / परिवार के पैसे सेएक वित्तीय वर्ष में ₹10 लाख तकशून्य
अपनी बचत / परिवार के पैसे से₹10 लाख से ऊपर वाले हिस्से पर2% (1 अप्रैल 2026 से; पहले ज़्यादा था)
अधिसूचित वित्तीय संस्थान के education loan सेकोई सीमा नहींशून्य

तीसरी पंक्ति ही असली बात है। ट्यूशन, रहने का ख़र्च, दैनिक ख़र्च — अगर वो रक़म पात्र education loan से जा रही है, तो TCS नहीं लगता, रक़म चाहे जितनी हो। TCS वापस मिल जाता है ITR में, पर तब तक पैसा साल भर के लिए फँसा रहता है — यही असली लागत है।

इसका व्यावहारिक अर्थ यह है: ₹45 लाख के विदेशी course में पूरी रक़म बचत से भेजने पर लाखों रुपये साल भर के लिए TCS में फँसते हैं, जबकि वही रक़म पात्र loan से जाने पर नहीं फँसती। शर्त के साथ मेरी राय — अगर पढ़ाई विदेश की है और रक़म बड़ी है, तो loan का रास्ता सिर्फ़ नक़दी के लिए नहीं, नक़दी के प्रवाह के लिए भी सही बैठता है, भले ही आपके पास पूरा पैसा हो।

Tax में क्या मिलता है — और किस regime में

शिक्षा ऋण के ब्याज पर छूट की कोई ऊपरी सीमा नहीं है — यह इसे 80C या 80D जैसी हर दूसरी छूट से अलग बनाता है। जितना ब्याज चुकाया, उतनी छूट। यह EMI शुरू होने के साल से लगातार 8 साल तक, या ब्याज पूरा चुकने तक, जो पहले हो, तब तक मिलती है। मूलधन पर कुछ नहीं मिलता।

Loan छात्र, माता-पिता, जीवनसाथी या क़ानूनी अभिभावक — किसी के भी नाम हो सकता है; छूट उसे मिलेगी जो असल में चुका रहा है और जिसके नाम loan है। पर वही पुरानी शर्त: यह लाभ सिर्फ़ old tax regime में मिलता है। New regime चुना है तो यह छूट नहीं बनती। परिवार में जो ज़्यादा कर देता है, उसके नाम loan रखने का यही असली फ़ायदा है — पर उससे पहले दोनों regimes का हिसाब लगा लीजिए, क्योंकि new regime की कम दरें कई मामलों में इस छूट से ज़्यादा बचा देती हैं। अपना आँकड़ा Income Tax Calculator पर देख लीजिए।

एक बात नोट कर लीजिए: नए Income Tax Act, 2025 के तहत धाराओं की संख्या बदल गई है (80C अब 123, 80D अब 126)। नए नंबर tax year 2026-27 के return से लागू होंगे, यानी जुलाई 2027 वाली filing से — इस साल के ITR में पुराने ही नंबर चलेंगे। पूरा ब्योरा धाराओं के बदले नंबरों वाले हिस्से में है।

वो चार ख़र्च जो ब्याज दर में नहीं दिखते

  1. Margin money। ₹4 लाख से ऊपर के loan में आम तौर पर देश के भीतर की पढ़ाई पर 5% और विदेश की पढ़ाई पर 15% हिस्सा परिवार को ख़ुद लगाना होता है। ₹30 लाख के विदेशी course में यह ₹4.5 लाख बैठता है — इसे पहले से जोड़कर रखिए।
  2. Processing fee। सरकारी बैंकों में देश के भीतर की पढ़ाई पर अक्सर शून्य, विदेश की पढ़ाई पर एक तय रक़म; NBFC में यह 1% तक जा सकती है, यानी ₹20 लाख पर ₹20,000।
  3. बंडल की गई बीमा policy। कई जगह loan के साथ एक credit-life policy जोड़ दी जाती है और उसका premium loan में ही डाल दिया जाता है — यानी उस पर भी ब्याज लगता है। ज़रूरत हो तो लीजिए, पर जानते हुए लीजिए; अलग से term insurance आम तौर पर सस्ता पड़ता है।
  4. Course पूरा न होने पर। बीच में पढ़ाई छूटने पर moratorium ख़त्म मान लिया जाता है और EMI तुरंत शुरू हो सकती है। यह धारा हर sanction letter में होती है और लगभग कोई नहीं पढ़ता।

Co-applicant का CIBIL — दोनों तरफ़ चलने वाली सड़क

Education loan में माता-पिता या अभिभावक co-applicant होते हैं, और मंज़ूरी में उनका credit score गिना जाता है। दो बातें इसी से निकलती हैं।

पहली — आवेदन से पहले co-applicant का score देख लीजिए; कम है तो सुधारने में तीन-चार महीने लगते हैं, और यह guide उसी के लिए है। दूसरी, और ज़्यादा ज़रूरी — भुगतान चूकने पर असर दोनों के score पर पड़ता है, छात्र के भी, जिसने अभी कमाना शुरू भी नहीं किया। पहली नौकरी लगने से पहले ही एक ख़राब credit history बन जाना, इस loan का सबसे कम दिखने वाला नुक़सान है। Score का पूरा गणित यहाँ है।

आवेदन से पहले — सात लाइनों की जाँच

  1. Moratorium में ब्याज simple है या compounded? Capitalise होगा या नहीं?
  2. Moratorium में ब्याज भरने पर दर में रियायत मिलती है? कितनी?
  3. संस्थान PM-Vidyalaxmi की पात्र सूची में है? Collateral की ज़रूरत हटेगी?
  4. परिवार की आय ₹8 लाख तक है? तो 3% ब्याज सहायता का दावा फ़ॉर्म में कहाँ भरना है?
  5. Margin money कितना, और वो कब जमा करना होगा?
  6. दर floating है या fixed? Fixed है तो prepayment पर क्या शर्त है?
  7. Course पूरा न होने या नौकरी देर से लगने पर क्या होगा — यह धारा किस पन्ने पर है?

इन सात जवाबों के बिना कोई sanction letter मत भरिए। और अगर कहीं कोई app "instant education loan, बिना दस्तावेज़" का वादा कर रहा है, तो उसे पहले नक़ली loan app पहचानने वाले guide से मिलाकर देख लीजिए। पढ़ाई का loan बैंक या पंजीकृत NBFC से लिया जाता है, किसी link से नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Education loan ke liye collateral (gaarantee) zaroori hai kya?

हर मामले में नहीं। आम तौर पर ₹4 लाख तक कोई security नहीं माँगी जाती, ₹4 से ₹7.5 लाख के बीच तीसरे पक्ष की गारंटी माँगी जा सकती है, और उससे ऊपर मूर्त संपत्ति गिरवी रखनी होती है। पर PM-Vidyalaxmi के तहत मान्यता प्राप्त संस्थानों के छात्रों को ₹7.5 लाख तक का loan बिना collateral और बिना guarantor मिलता है, क्योंकि उस पर सरकार की credit guarantee होती है।

Moratorium period me byaj lagta hai ya nahi?

लगता है — यही सबसे महँगी ग़लतफ़हमी है। Moratorium में EMI नहीं देनी पड़ती, ब्याज माफ़ नहीं होता। सरकारी बैंक आमतौर पर इस दौरान simple interest लगाते हैं, जबकि कई NBFC हर महीने चक्रवृद्धि ब्याज जोड़ते हैं। फ़र्क़ छोटा नहीं होता — नीचे table में ₹20 लाख के उदाहरण पर दोनों का हिसाब लगाया है। अगर घर से थोड़ा-थोड़ा दिया जा सकता है, तो moratorium के दौरान सिर्फ़ ब्याज भरते रहिए; ज़्यादातर बैंक इस पर 0.5% से 1% तक की छूट भी देते हैं।

PM-Vidyalaxmi me 3% interest subvention kise milta hai?

जिन परिवारों की सालाना आय ₹8 लाख तक है, उन्हें moratorium अवधि के दौरान 3% ब्याज सहायता मिलती है। यह उन छात्रों के लिए है जिन्हें योजना के दायरे में आने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश मिला हो। आवेदन एक ही जगह से होता है — Vidya Lakshmi/PM-Vidyalaxmi पोर्टल पर, जहाँ आवेदन की स्थिति भी दिखती रहती है।

Videsh padhne ke liye paisa bhejne par TCS lagta hai kya?

निर्भर करता है कि पैसा कहाँ से जा रहा है। अपनी बचत से भेज रहे हैं तो LRS के तहत एक वित्तीय वर्ष में ₹10 लाख से ऊपर की रक़म पर TCS लगता है, और 1 अप्रैल 2026 से यह दर घटकर 2% रह गई है। पर अगर वही पैसा किसी अधिसूचित वित्तीय संस्थान से लिए गए education loan से जा रहा है, तो रक़म चाहे कितनी भी हो, TCS शून्य है। यही एक वजह है कि विदेश की पढ़ाई में loan का रास्ता, पूरी रक़म बचत से भेजने के मुक़ाबले, अक्सर सस्ता पड़ जाता है।

Education loan par tax me kya chhut milti hai?

चुकाए गए ब्याज की पूरी रक़म पर छूट मिलती है — कोई ऊपरी सीमा नहीं, यह इसकी सबसे बड़ी ख़ूबी है। यह छूट EMI शुरू होने के साल से लगातार 8 साल तक, या ब्याज पूरा चुकने तक, जो पहले हो, तब तक चलती है। मूलधन पर कोई छूट नहीं। पर शर्त वही है जो अक्सर छूट जाती है — यह लाभ सिर्फ़ old tax regime में मिलता है, new regime में नहीं। Loan माता-पिता, जीवनसाथी या क़ानूनी अभिभावक के नाम भी हो सकता है, बशर्ते चुकाने वाला वही हो जो छूट ले रहा है।

Education loan time se pehle chuka dein to penalty lagti hai kya?

Floating-rate वाले व्यक्तिगत loans पर बैंक और NBFC foreclosure charge नहीं लगा सकते — यह RBI का नियम है, और शिक्षा ऋण आम तौर पर floating दर पर ही होते हैं। Fixed-rate वाले loan में शर्तें अलग हो सकती हैं, इसलिए sanction letter में prepayment वाली धारा पढ़ लीजिए। और चुकाने के बाद NOC तथा गिरवी रखे दस्तावेज़ वापस लेना मत भूलिए।

Pakke Sources — हमने कहाँ से verify किया

  1. PM-Vidyalaxmi / Vidya Lakshmi — आधिकारिक पोर्टलEk hi jagah se aavedan; sthiti aur patra sansthanon ki soochi
  2. Ministry of Education — PM-Vidyalaxmi scheme₹7.5 lakh tak credit guarantee, ₹8 lakh tak aay par 3% interest subvention; 1,12,817 loans / ₹15,634 crore (21 July 2026 tak)
  3. Income Tax Department — education loan interest deductionByaj par bina seema chhut, 8 saal tak; sirf old regime me
  4. Income Tax Department — TCS on LRS remittances₹10 lakh ki seema; 1 April 2026 se 2%; adhisoochit sansthan ke education loan par shoonya
  5. Indian Banks' Association — Model Education Loan SchemeMargin money, collateral ki seemayein aur moratorium ki maanak sharten
  6. RBI — foreclosure charges on floating-rate loans to individualsFloating-rate vyaktigat loans par prepayment penalty nahi
Zaroori baat: Ye jaankari education ke liye hai — insurance ki salah nahi. Policy lene se pehle policy wording khud padhein. PaisaPakka koi insurance nahi bechta aur hamare paas koi agent code nahi hai.
Meera Iyer avatar
Insurance & Loans Desk

Policy ka jo page koi nahi padhta, Meera wahi padhti hai. Claim reject kyun hota hai, agreement me kya chhupa hai, kaunsa 'free' card free nahi hai — fine print se pakki jaankari.

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